ऐसे करें चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन ‘महागौरी’ की पूजा

चैत्र नवरात्रि की अष्टमी को माँ महागौरी की पूजा की जाती है. आज चैत्र नवरात्रि की सप्तमी और अष्टमी दोनों पड़ रही है. चैत्र नवरात्रि में अष्टमी के दिन माता दुर्गा का आठवां स्वरूप महागौरी की पूजा का विशेष महत्व है.

इस दिन मां दुर्गा के महागौरी रूप का पूजन किया जाता है. माता का स्वरूप, अधिक गोरा होने के कारण इन्हें महागौरी कहा जाता है. महागौरी की आराधना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं.

महागौरी की आराधना का महत्व
महागौरी की आराधना से समस्त पापों का नाश होता है, सुख-सौभाग्य की प्राप्‍ति होती है और हर मनोकामना पूर्ण होती है. कहते हैं कि आज के दिन ही राजा रामचन्द्र जी ने लंका चढ़ाई से पहले माँ महागौरी की पूजा की थी. माता महागौरी नें इन्हें विजयी होने का वरदान दिया था.

महाष्टमी को माता महागौरी की पूजा होती है. इससे सभी तरह के संकटों से मुक्ति मिलती है. शनिवार को महाष्टमी को पड़ने के कारण माता महागौरी शनि की कष्टों से भी मुक्ति दिलाएगी.

कन्या पूजन
महाष्टमी में कन्या पूजन का महत्व बढ़ जाता है. लक्ष्मी समान कन्याएं बुद्धि ,धन और शनि के कष्टों से मुक्ति का वरदान देती हैं. हर लड़ाई में विजयी होने का वरदान महाष्टमी के व्रत की समाप्ति के साथ घर या बाहर की 3 या 5 या 8 कन्याओं का पूजन आवश्यक करना चाहिए.

नवरात्रि की महाष्टमी में कन्याएं मां दुर्गा के रूप में बुद्धि, धन विजयी होने का वरदान देतीं हैं. इसलिए नवरात्र में कन्याओं का सम्मान किए बगैर माता महागौरी वरदान नहीं देती हैं.

महागौरी की पूजा
ध्यान मंत्र-
श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बर धरा शुचि:.

महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

महागौरी पूजा-विधि
चैत्र नवरात्रि की अष्टमी के दिन कन्या पूजन और भोजन का विधान है. इस दिन महिलाओं को अपने सुहाग के लिए देवी महागौरी को चुनरी भेंट करना चाहिए. अष्टमी के दिन महागौरी की पूजा पंचोपचार सहित करें.

देवी का ध्यान करने के लिए दोनों हाथ जोड़कर इस मंत्र का उच्चारण करें ‘सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि. सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥’

महागौरी रूप में देवी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल दिखती हैं. देवी के इस रूप की प्रार्थना करते हुए देव और ऋषिगण कहते हैं “सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते..