अयोध्या मामलाः SC में मुस्लिम पक्षकार ने कहा- एक बार मस्जिद बन जाए तो वह अल्लाह की संपत्ति

16 मार्च को शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने विवाद स्थलों को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को विवादित स्थलों पर नमाज बंद करवाने का सुझाव दिया था. इन स्थलों में उन्होंने अयोध्या में बनी मस्जिद को भी शामिल किया. साथ ही उन्होंने कहा कि अयोध्या का विवादित स्थल हिंदुओं को सौंप देना चाहिए, क्योंकि वहां मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाया गया है.

गौरतलब है कि रिजवी इससे पहले भी कई बार अयोध्या में राम मंदिर बनाए जाने की वकालत कर चुके हैं. हालांकि, इसके लिए उन्हें मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से आलोचना सहनी पड़ी थी.

सुप्रीम कोर्ट में आज (शुक्रवार)अयोध्या मामले में सुनवाई के दौरान बाबरी मस्जिद के पक्षकारों की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने 1994 के इस्माइल फारुखी फैसले पर दोबारा विचार की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस फैसले में मस्ज़िद को इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं माना गया था.

राजीव धवन ने कहा कि इस्लाम के तहत मस्ज़िद का बहुत महत्व है, यदि एक बार मस्ज़िद बन जाए तो वो अल्लाह की संपत्ति मानी जाती है, उसे तोड़ा नहीं जा सकता. बाबरी पक्षकारों के वकील ने कहा कि खुद पैग़ंबर मोहम्मद ने मदीना से 30 किमी दूर मस्ज़िद बनाई थी. इस्लाम में इसके अनुयायियों के लिए मस्ज़िद जाना अनिवार्य माना गया है.

राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ये कह देना कि इस जगह (अयोध्या में विवादित ढांचे पर) कोई मस्ज़िद नहीं थी, उससे कुछ नहीं होता. यह किसने आदेश दिया कि वहां नमाज नहीं पढ़ी जाएगी. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई पूरी हो चुकी है. अब मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी.

वसीम रिजवी अयोध्या मामले को लेकर मीडिया से बात कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘शिया वक्फ बोर्ड ये तय कर चुका है कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा और लखनऊ में मस्जिद ए अमन बनें. उन्होंने आगे कहा कि चाहे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हो या फिर शिया पर्सनल लॉ बोर्ड, ये वक्फ संपत्ति का मामला है, उनको इस मामले में दखल देने का कोई हक नहीं है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 14 मार्च को हुई सुनवाई में मुख्य पक्षकारों के अलावा बाकी तीसरे पक्षों की ओर से दायर हस्तक्षेप अर्जियों को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस मामले में वो आगे से किसी तीसरे पक्ष की हस्तक्षेप अर्जी को स्वीकार ना करे.

केवल मुख्य पक्षकार जो कि HC में थे, उन्हें ही इस केस में रहने इजाज़त होगी. कोर्ट ने इस केस में सलमान खुर्शीद समेत करीब 32 लोगों की ओर से दायर हस्तक्षेप अर्जी पर दखल देने से इनकार करते हुए केस में अनावश्यक दखल से बचाने के लिए कदम उठाया. हालांकि पूजा के अधिकार का हवाला देते हुए दाखिल स्वामी की मूल याचिका को कोर्ट ने उचित पीठ के पास लेकर जाने को कहा है.

कोर्ट ने कहा कि केवल मुख्य पक्षकार जो कि हाई कोर्ट में थे, उन्हें ही इस केस में रहने इजाज़त होगी. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील एजाज़ मकबूल ने उन दस्तावेजों की जानकारी दी,जो कोर्ट में जमा कराए गए है. मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को दोपहर 2 बजे होगी जहां सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा कि इस मामले को 5 जजों की संविधान पीठ के पास भेजा जाए या नहीं.