चीन और पाकिस्तान सीमा पर रेलवे कर रही है बड़ी तैयारी, अब मिलेगी सेना को मदद

सेना के आधारभूत ढांचे की जरूरतों को पूरा करने के लिए रेलवे को सर्वोच्च वरीयता देने को कहा गया है. साथ ही चीन और पाकिस्तान से लगी सीमा पर सैन्य बलों और अहम हथियारों को ले जाने वाली विशिष्ट ट्रेनों की गति भी बढ़ाने की अपील की गई है. भारतीय रेलवे ने सेना की इन जरूरतों पर काम भी शुरू कर दिया है.

आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को बताया कि रेलवे ने यह फैसला भी लिया है कि वह सेना के हथियार और सैन्य बलों को ले जाने वाली विशिष्ट ट्रेनों की रीयल टाइम जानकारी को ऑनलाइन देखने की क्षमता भी सेना को दे देगी. ताकि उन्हें रेलवे की इस ऑनलाइन निगरानी प्रणाली का पूरा लाभ मिल सके.

रेल मंत्रालय, सेना मुख्यालय के उस प्रस्ताव से भी सहमत है कि जिसमें पूर्वोत्तर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में सेना के लिए पूरी तरह से समर्पित प्रतिष्ठान बनाने और लाइनें बिछाने को कहा है. ताकि चीन से लगी सीमा पर स्थित अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न सेक्टरों में हथियारों को तेजी से पहुंचाया जा सके.

सूत्रों ने बताया कि सेना के सर्वोच्च अफसरों ने रणनीतिक जरूरतों के बारे में रेलवे को बता दिया है और रेलवे ने इस पर काम करना भी शुरू कर दिया है. सेना के लिए यह सुविधाएं अरुणाचल प्रदेश के भालुकपुंग, असम के सिलापाथर व माकुम और नगालैंड के मोकोकचुंग और दीमापुर में स्थापित की जाएंगी. रेलवे ने अपने अफसरों को भी पूर्वोत्तर और पाकिस्तान से लगी भारतीय सीमा के विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर भेज दिया है, ताकि वह पता कर सकें कि सेना की आधारभूत ढांचे को लेकर क्या खास जरूरतें हैं.

सूत्रों का कहना है कि सेना के लिए इस्तेमाल होने वाली विशिष्ट ट्रेनों की गति बढ़ाने के साथ ही लेट-लतीफी भी दूर की जाएगी. मौजूदा समय में सशस्त्र सेनाओं को ले जाने वाली इन ट्रेनों की रफ्तार 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा ही रहती है. सेना विशेष रूप से अपने विभिन्न कामों के लिए सालाना करीब 750 ट्रेनों का इस्तेमाल करती है. इन कार्यों में युद्धक टैंकों को ले जाना, आर्टिलरी बंदूकें, इंफैंट्री कांबैट वेहकिल और मिसाइलें ले जाना शामिल है. इस काम के लिए सेना रेलवे को करीब 2,000 करोड़ रुपये देती है.

सूत्रों का कहना है कि रेलवे ने कम समय में सैनिकों को जनरल ट्रेनों में ले जाने का भी कोटा बढ़ाने के संकेत दिए हैं. सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि युद्ध के समय सेना को अपने हथियार और सैन्य बल ले जाने के लिए रेलवे बहुत ही जरूरी अंग है.

ज्ञात हो कि पिछले साल 16 जून को डोकलाम में भारत और चीन के बीच गतिरोध शुरू हुआ था जो 73 दिनों तक चला था. चीन लगातार विवादित क्षेत्रों में अपने सैन्य ढांचे और सेना को बढ़ाता जा रहा है.