आज होगा RSS के नए सरकार्यवाह का चुनाव, जानें कैसे होता है यह चुनाव

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक शुक्रवार से नागपुर में शुरू हो गई है. इस बैठक में संघ के नए सरकार्यवाह के नाम पर मुहर लगनी है. खबरों के मुताबिक शनिवार को नए सरकार्यवाह के नाम की घोषणा हो सकती है.

माना जा रहा है कि दत्तात्रेय होसबोले को संघ के नए सरकार्यवाह का पदभार सौंपा जाएगा. शनिवार को वर्तमान सरकार्यवाह अपने कार्यकाल के पूरा होने की घोषणा करेंगे और नए चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध करेंगे.

गौरतलब है कि सरकार्यवाह के पद पर भैयाजी जोशी पिछले 9 साल से हैं. इस बार उनकी जगह ये जिम्मेदारी सहसरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को दी जा सकती है. वैसे भैयाजी जोशी की जगह होसबोले को जिम्मेदारी मिलने की चर्चा पिछली प्रतिनिधिसभा की बैठक में भी उठी थी, लेकिन तब भैयाजी को ही इस पद पर बने रहने को कहा गया और मामला टल गया.

माना जा रहा है कि इस बार भैयाजी जोशी को उनकी मौजूदा जिम्मेदारी से मुक्त किया जा सकता है और संघ प्रमुख मोहन भागवत के बाद दत्रात्रेय होसबोले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में नंबर दो की भूमिका में आ सकते हैं. भैयाजी जोशी खुद अपने स्वास्थ कारणों के चलते पदमुक्त होने का आग्रह कर चुके हैं.

ऐसे चुने जाते हैं सरकार्यवाह
वर्तमान सरकार्यवाह नए सरकार्यवाह की चुनाव प्रकिया शुरू करने के आग्रह के बाद मंच से नीचे उतर जाएंगे. इसके बाद सबसे वरिष्ठ सह सरकार्यवाह के चुनाव के लिए चुनाव अधिकारी की घोषणा करेंगे.

इसके बाद चुनाव अधिकारी चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत करते हुए नए सरकार्यवाह के लिए नाम मांगेंगे. केंद्रीय प्रतिनिधियों के इस चुनाव में केंद्रीय प्रतिनिधि ही वोटर होते हैं, लेकिन कोई भी प्रचारक वोटर नहीं होता.

अगर किसी को कोई नाम देना होता है तो वो 3 से 4 अनुमोदक के साथ नाम प्रस्ताव कर सकता है. लेकिन आम तौर पर सरकार्यवाह का चुनाव सर्व सम्मति से होता है.

नए सरकार्यवाह का नाम चुनाव अधिकारी बताते हैं और सभी लोग ॐ उच्चारण के साथ हाथ उठाकर नए सरकार्यवाह का चुनाव सम्पन्न कराते हैं. अगले दिन सरसंघचालक और सरकार्यवाह अपनी कार्यकारणी का ऐलान करते हैं.

हर तीन वर्ष पर प्रतिनिधि सभा की संगठन मुख्यालय नागपुर में होने वाली बैठक में संघ के सरकार्यवाह (एक तरह से कार्यकारी प्रमुख) का चुनाव किया जाता है. इसके साथ ही संघ के अन्य प्रमुख पदाधिकारियों की नियुक्ति भी होती है. सभी पदाधिकारियों का कार्यकाल तीन साल का होता है.