यूपी : मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की महिला टेलीकालरों से दुर्व्यवहार

यूपी की राजधानी लखनऊ के गोमती नगर के विभूतिखंड स्थित साईबर हाईट में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में काम करने वाली महिला टेलीकालरों द्वारा चार माह से लटके वेतन की मांग करने पर कमरे में बंद कर प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है.

जिसके चलते कुछ युवतियां बेहोश हो गई. युवतियों को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पुलिस से भी प्रदर्शनकारियों की भिड़ंत हो गई.

इस मामले में विभूतिखंड थाना प्रभारी सत्येंद्र कुमार राय का कहना है कि कर्मचारियों को तीन महीने की ट्रेनिंग और एक महीने का वेतन नहीं मिला है. मामले की पड़ताल कर उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है.

दरअसल गोमतीनगर के विभूतिखंड में साईबर हाईट में सीएम हेल्पलाइन संचालित है. इस हेल्पलाइन में सुरेविन बीपीओ सर्विसेज की ओर से कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है. आरोप है कि इस कम्पनी ने उन्हें चार महीने से वेतन ही नहीं दिया है. वेतन मांगने पर धमकी दी जा रही है.

हेल्पलाइन में कार्यरत युवतियों ने बताया कि तीन चार महीने से हमें वेतन नहीं मिला. इसके लिए कई बार मांग उठाई गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. आरोप है कि शुक्रवार सुबह वेतन की मांग करने पर ट्रेनर और सुपरवाइजर अनुराग और आशुतोष ने हेल्पलाइन की टेलीकॉलर 20 लड़कियों को एक कमरे में बंद कर दिया और सादे कागज पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया.

युवतियों का आरोप है कि इंकार करने पर उनका दुपट्टा खींच कर बदतमीजी की गई. इस बीच मोहनलालगंज की शालू यादव, बिहार की शिवानी, मडियांव की सीमा, जौनपुर निवासी मंजू यादव और मडियांव की निवासी शमा नाज परवीन समेत कुछ लड़कियां बेहोश हो गईं जिसके बाद सकते में आए दोनों ट्रेनर भाग निकले.

साथी कर्मचारी उन्हें लोहिया अस्पताल में लेकर पहुंचे. सूचना पर पहुंची पुलिस टीम से भी सबकी भिड़ंत हुई. टेलीकॉलरों ने आरोप लगाया कि दो दिन पहले विभूतिखंड इंस्पेक्टर सत्येंद्र कुमार राय से मामले की शिकायत की गई लेकिन पुलिस ने उन लोगों को ही जेल बन्द करने की धमकी दी थी.

इस मामले में बीपीओ के प्रोजेक्ट हेड ध्रुव मिश्रा ने कहा कि कंपनी में कई शरारती तत्व हैं जो लोगों को भड़का रहे हैं. हम उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन वे माहौल खराब कर रहे हैं. लड़कियों के उत्पीड़न के मामले में उनका कहना है कि आरोप गलत है लेकिन इस शिकायत की जांच कराएंगे. हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, उनके जरिए जांच की जाएगी.