लालू यादव के बेटे ने कहा- बिहार से ईंट ले जाकर बनाएंगे अयोध्या में राम मंदिर

लालू प्रसाद यादव की छवि मुस्लिमों के प्रति नरमी की रही है. बिहार की राजनीति में उनके पास मुस्लिमों और यादवों का बड़ा वोट बैंक है. राम मंदिर के नाम पर रथ यात्रा पर निकले बीजेपी के लालकृष्ण आडवाणी को उन्होंने गिरफ्तार करवा दिया था, जिसके बाद से मुस्लिमों का उनके प्रति खास जुड़ाव देखा जाता रहा है. ऐसे में तेजप्रताप यादव का राम मंदिर बनवाने की बात करना राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बन गया है.

शुक्रवार को नालन्दा जिले के मघड़ा गांव में आयोजित शीतलाष्टमी मेले में तेजप्रताप यादव ने कहा कि अगर अगली बार बिहार में आरजेडी की सरकार बनी तो वे अयोध्या राम मंदिर का निर्माण कराएंगे. उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए वे बिहार से एक-एक ईंट उत्तर प्रदेश ले जाएंगे और राम मंदिर बनवाएंगे. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि वे राम मंदिर का निर्माण सभी धर्मों के लोगों को साथ लेकर कराएंगे.

अयोध्या में राम मंदिर बनाने के खिलाफ नजर आने वाले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेटे और पूर्व मंत्री तेजप्रताप ने चौंकाने वाला बयान दिया है. तेजप्रताप यादव ने सीएम नीतीश कुमार के गृह जिले नालन्दा की एक सभा में कहा कि वह अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करेंगे.

इससे पहले तेजप्रताप यादव ने शीतलाष्टमी मेले में दंगल प्रतियोगिता का शुभारंभ किया. बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव ने शंखनाद व बांसुरी बजाकर भाषण की शुरुआत की. उन्होंने दंगल प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया. तेजप्रताप यादव ने आरएसएस और बीजेपी को निशाने पर लिया और कहा कि ये लोग वोट लेने के बाद मंदिर का मुद्दा भूल जाते हैं. इस बार आरजेडी बिहार में सत्ता में आई तो अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कराया जाएगा.

2019 का लोकसभा चुनाव संपन्न होने तक राम मंदिर मुद्दे पर फैसला टाले उच्चतम न्यायालय: ओवैसी
एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट बाबरी मस्जिद- राम जन्मभूमि विवाद पर अपना फैसला2019 के लोकसभा चुनावों के संपन्न होने तक टाल दे, क्योंकि इस मुद्दे का‘‘ भारी राजनीतिकरण’’ हो जाएगा. ओवैसी ने कहा कि जमीन के मुद्दे पर अयोध्या विवाद का धार्मिक आस्था से कोई लेना- देना नहीं है.

ओवैसी ने कहा, ‘राम मंदिर का मुद्दा जमीन के मालिकाना हक का मामला है. इसका आस्था से कोई लेना- देना नहीं है. यह न्याय एवं धर्मनिरपेक्षता के शासन से जुड़ा है. हर एक को उच्चतम न्यायालय का फैसला स्वीकार करना होगा. बहरहाल, संसदीय चुनावों से पहले इस मुद्दे पर फैसला नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे भारी राजनीतिकरण हो जाएगा.’

इस परिचर्चा में कांग्रेस प्रवक्ता संजय निरूपम और बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा भी शामिल थे. बीजेपी को आड़े हाथ लेते हुए निरूपम ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी की दिलचस्पी मंदिर बनाने में नहीं, बल्कि मुद्दे के राजनीतिकरण में है.