जानें क्या हैं इच्छामृत्यु

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु मामले की याचिका पर सुनवाई करते हुए इच्छा मृत्यु को सशर्त सही ठहराया है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने कहा कि हर व्यक्ति को गरिमा के साथ मरने का अधिकार है.

कोर्ट ने कहा कि अगर डॉक्टर कहता है कि मरीज की बीमारी लाइलाज है तो वह मरीज इच्छामृत्यु मांग सकता है. साथ ही कोर्ट ने कोमा में जा चुके या मौत की कगार पर पहुंच चुके लोगों को वसीयत (Living Will) के आधार पर निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) का हक होगा.

क्या है लिविंग विल?
लिविंग विल एक लिखित दस्तावेज होता है, जिसमें कोई मरीज मरने से पहले अपनी इच्छा लिख देता है कि मृत्यु होने पर या मृत्यु तक पहुंचने या रजामंदी नहीं दे पाने की स्थिति में पहुंचने पर उसे किस तरह का इलाज दिया जाए.

क्या है इच्छामृत्यु?
अगर कोई सख्स किसी गंभीर या लाइलाज बीमारी से पीड़ित है तो उसे दर्द से निजात देने के लिए डॉक्टर की मदद से उसकी जिंदगी का अंत करना ही इच्छा मृत्यु है. इच्छा मृत्यु दो तरह की होती है.

1- सक्रिय इच्छामृत्यु (Active Euthanasia),

2- निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia)

सक्रिय इच्छामृत्यु-: सक्रिय इच्छामृत्यु में मरीज को जहर या पेनकिलर के इंजेक्शन का ओवरडोज देकर मौत दी जाती है. इस तरह की इच्छामृत्यु को भारत समेत ज्यादातर देशों में अपराध माना जाता है. सर्वोच्च न्यायलय ने इसे मंजूरी नहीं दी है.

निष्क्रिय इच्छामृत्यु-: निष्क्रिय इच्छामृत्यु में यदि कोई शख्स लंबे समय से कोमा में है तो उसके परिवार वालों की अनुमति पर उसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटाना निष्क्रिय इच्छामृत्यु है.

मुंबई की नर्स अरुणा शानबाग मामले में दायर पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट ने 7 मार्च 2011 को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की इजाजत दे दी थी. हालांकि, कोर्ट ने अरुणा के लिए दायर की गई याचिका खारिज कर दी थी.

साभार -हरिभूमि