इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में सोनिया ने कहा- अच्छे दिनों का होगा शाइनिंग इंडिया जैसा हाल

सोनिया गाँधी ने यह बात प्राइवेट चैनेल को दिए इंटरव्यू में कही. 19 साल तक कांग्रेस का नेतृत्व करने वाली सोनिया गांधी हाल ही में राहुल गांधी को पार्टी की कमान सौंपने के बाद पहली बार किसी बड़े मंच पर शिरकत करेंगी. बाद में उनके नेतृत्व में कांग्रेस और यूपीए ने लगातार दो बार लोकसभा चुनावों में जीत हासिल कर केंद्र में सरकार बनाई.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में जयंत सिन्हा ने कहा कि देश में बेरोजगारी इतनी बड़ी समस्या नहीं है जितना कांग्रेस दावा कर रही है. सचिन पायलट ने कहा कि बीजेपी का यह दावा कि देश में कई ऐसे क्षेत्र में नौकरियां आई हैं जिसे आंकड़ों में नहीं दर्शाया जा सका है पूरी तरह गलत है. पायलट ने कहा कि पूरी ग्रोथ सिर्फ आंकड़ों में है लेकिन नई नौकरियों को लाने की कोशिश करने की जरूरत है.

पायलट ने कहा कि केन्द्र सरकार को यह मानने की जरूरत है कि देश में रोजगार बड़ी चुनौती है क्योंकि इसे नकार कर कोई फायदा नहीं होगा.

कोटक ने कहा कि एजुकेशन और हेल्थकेयर के क्षेत्र में बड़ी नौकरियां आ सकती हैं. कोटक ने कहा कि 60 के दशक में भारत और चीन में लगभग एक समान जीडीपी थी. लेकिन फिर 70, 80 और 90 के दशक में चीन इतना आगे निकल गया कि हमें अगले कई दशक लगाने होंगे उसकी बराबरी करने के लिए.

सोनिया गांधी ने कहा कि पब्लिक स्पीकिंग मेरे लिए बहुत स्वाभिक नहीं है लिहाजा मैं पढ़ने में ज्यादा समय देती हूं. अब मैं एक सामान्य कांग्रेस कार्यकर्ता के तौर पर पार्टी में हूं. सोनिया गांधी ने कहा कि वह देश से पूछना चाहती हैं कि क्या मई 2014 से पहले देश एक ब्लैकहोल था और सिर्फ इस तारीख के बाद ही देश ने सबकुछ किया है.

सोनिया गांधी ने कहा कि सत्तारूढ़ सरकार की तरफ से उन्मादी बयान जानबूझ कर दिए जा रहे हैं और इसके गलत परिणाम हमारे सामने होंगे. मौजूदा समय में खुद के विषय में सोचने पर भी हमला किया जा रहा है. धार्मिक तनाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. दलितों और महिलाओं पर सुनियोजित हमला किया जा रहा है. ऐसी स्थिति में उस भारत का क्या हुआ जो हम बनाना चाहते थे.

हमें तेज चलने की जरूरत है लेकिन इतना तेज भी नहीं कि बड़ी जनसंख्या पीछे छूट जाए. सोनिया गांधी ने कहा कि मैक्सिमम गवर्नमेंट का क्या मतलब है जब देश में लोगों को नौकरी नहीं दी जा सकती है. सोनिया गांधी ने कहा कि नोटबंदी ने किस तरह अर्थव्यवस्था को पीछे ढ़केल दिया यह पूरा देश जानता है. वहीं किसानों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है. सोनिया ने कहा कि हमें चीजों को उसी तरह देखने की जरूरत है जैसी वह वास्तविकता में हैं न कि उसे पैकेज करके.

अब सोनिया गांधी दूसरी बार इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के मंच पर ऐसे समय पर आ रही हैं जब विपक्ष में बैठी कांग्रेस 2019 की जंग में जाने के लिए राहुल गांधी के नेतृत्व में तैयार हो रही है. वे इंडिया टुडे कॉन्क्लेव की इस साल की थीम दि ग्रेट चर्न- ट्रायंफ्स एंड ट्रिब्यूलेशन्स पर कीनोट एड्रेस (9 मार्च) देंगी.

सोनिया गांधी ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने के बाद अब उनके पास अधिक समय है. लिहाजा इस समय में वह राजीव गांधी से जुड़े पुराने दस्तावेजों को पढ़ने और परिवार की जिम्मेदारी निभाने में लगा रही है. अरुण पुरी ने पूछा कि क्या पार्टी का पद छोड़ने के साथ उनका राजनीतिक सफर खत्म माना जाए.

सोनिया ने कहा कि वह राहुल के साथ पार्टी के मामलों पर लगातार बातचीत करती रहती हैं. वहीं सोनिया ने कहा कि उनकी कोशिश है कि वह देश में एक सेक्युलर फ्रंट को तैयार करने में भूमिका अदा करें जिससे देश की राजनीति को अच्छी दिशा मिलती रहे.

राहुल गांधी को सलाह के मुद्दे पर सोनिया ने कहा कि वह अपना मत किसी पर थोपने की कोशिश नहीं करती है. लिहाजा यह जरूरी कि उन्हें उनका काम करने की पूरी स्वतंत्रता रहे. सोनिया ने कहा कि पार्टी के सभी नेताओं का काम करने का अपना तरीका है. राहुल की भी अपनी स्टाइल है. राहुल की कोशिश रही है कि कांग्रेस में नई जान फूंकने के कदम उठाए जाएं, हालांकि इस कोशिश में वरिष्ठ नेताओं को भूलने की नहीं बल्कि युवाओं को उनके साथ आगे लाने की है.

सोनिया ने कहा कि कांग्रेस की लगातार 10 साल तक सरकार रही लिहाजा 2014 में कुछ एंटीइन्कम्बेंसी थी. इसके साथ ही कांग्रेस को नरेन्द्र मोदी के सामने मार्केटिंग में मात खानी पड़ी. लिहाजा, सोनिया ने कहा कि कांग्रेस को आम आदमी से कनेक्ट करने के लिए नई स्टाइल की जरूरत है. इसके साथ ही कांग्रेस को अपने प्रोग्राम और पॉसिलीज को नए तरीके से पेश करने की जरूरत है.

2014 के आमचुनावों में भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा बना लेकिन यह मुद्दा गलत आंकड़ों और दावों पर तैयार किया गया था. सीएजी की भूमिका भी इस मुद्दे को बढ़ाने में अहम थी. उस वक्त गुजरात में गैस के मुद्दे पर भी सीएजी ने सवाल उठाया था लेकिन अब उस मुद्दे को उठाने की आजादी नहीं है वहीं मौजूदा सरकार इस मामले में कुछ नहीं कर रही है.

मैं मोदी को नहीं जानती. बतौर प्रधानमंत्री उन्हें संसद में अथवा देश और दुनिया में अलग-अलग कार्यक्रमों में जरूर देखती हूं. लेकिन निजी तौर पर मैं उन्हें नहीं जानती. सोनिया ने कहा कि बीजेपी के सपोर्टर अब संसद में उनका विरोध कर रहे हैं. टीडीपी, शिवसेना जैसी पार्टियां भी अब उनका विरोध कर रही हैं.

सोनिया ने कहा कि 2019 में मुख्य मुद्दा बीजेपी द्वारा बीते 5 साल के दौरान किए गए वादे होंगे क्योंकि पूरा कार्यकाल खत्म होने के बाद भी उनके सारे वादे सिर्फ सुनहरे वादे ही रह गए. मुझे पूरा भरोसा है कि बीजेपी के अच्छे दिन एक बार फिर उनके लिए शाइनिंग इंडिया बनने जा रहा है.