महाराष्ट्र : सरकार पर बढ़ रहा है दबाव, ऋण माफी के लिए ठाणे पहुंचे 20 हजार किसान

ऑल इंडिया किसान सभा की मांग है कि सरकार सुपर हाइवे और बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार किसानों की जमीन पर अधिग्रहण न करें. ऑल इंडिया किसान सभा के अजीत नवाले ने बताया कि ‘हम पिछले 2 सालों से इन मांगों पर सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहे थे लेकिन सरकार ने हर बार अनदेखी की जिसके बाद हमने ये मार्च निकाला है.’

महाराष्ट्र में पूरी तरह से ऋणमाफी के लिए ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) के अंतर्गत 30,000 हजार किसान विरोध प्रदर्शन करते हुए शुक्रवार को ठाणे पहुंच गए हैं.

इस समय विरोध कर रहे किसान ठाणे के शाहपुर पहुंच गए हैं, यह स्थान मुंबई से केवल 73 किलोमीटर दूर है. किसान जो हर दिन 30 किलोमीटर की यात्रा तय कर रहे हैं, उनका लक्ष्य 12 मार्च को विधानसभा का घेराव करना है.

180 किलोमीटर लंबी इस यात्रा की शुरूआत 5 मार्च को सेंट्रल नासिक के सीबीएस चौक से हुई थी. राज्य के किसान पूरी तरह से ऋण और बिजली के बिलों को माफ करने की मांग कर रहे हैं. पिछले साल महाराष्ट्र की सरकार ने ऋणमाफी योजना के प्रथम चरण के तहत 4,000 करोड़ रुपए के ऋण की माफी की घोषणा की थी. इस मार्च में शामिल होने के लिए महिलाओं के साथ ही युवा और वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हैं.

मार्च में शामिल हुए डिंडोरी तहसील के किसान बीबीबाई कोकटे ने कहा- हमारी मांग है कि जंगल के जिस क्षेत्र पर हम पिछले तीन सालों से जुताई कर रहे हैं उसे हमारे नाम पर ट्रांसफर कर दिया जाए. हम पांच एकड़ की जमीन पर जुताई का काम कर रहे हैं जबकि मुझे जिला अधिकारियों से केवल 1.5 एकड़ का सर्टिफिकेट दिया गया है.

यह न्यायसंगत नहीं है. जमीन के इतने छोटे से टुकड़े में खेती कैसे होगी? हम ज्यादा कुछ नहीं बस उतनी ही जमीन की मांग कर रहे हैं जिसपर हम सालों से जुताई कर रहे हैं.