उत्तराखण्डः भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी की है लम्बी लाईन, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़

भर्ती परीक्षाओं में लगातार घपलों से राज्य का युवा खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है. उत्तराखंड में परीक्षाओं की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है.

उत्तराखंड बनने के बाद से अब तक हुई कोई भी भर्ती परीक्षा विवादों से नहीं बच पाई है. हर भर्ती परीक्षा में न सिर्फ घपले सामने आए, बल्कि इन घपलों के कारण भर्ती लटकने के साथ कई बार निरस्त भी हो गईं.

आइए जानते हैं ऐसी आठ भर्ती परीक्षाएं जो विवादों में घिरी हैं…

1. दरोगा रैंकर्स परीक्षा घपला

पुलिस विभाग में पिछली सरकार में हुई दरोगा रैंकर्स भर्ती परीक्षा पर भी सवाल खड़े हुए. सिपाही से दरोगा में पदोन्नति को हुई इस परीक्षा में नकल कराने तक के आरोप लगे. टिहरी और पिथौरागढ़ समेत तमाम जिलों में कुछ विशेष लोगों को एक अलग कमरे में बैठाकर परीक्षा दिलाई गई थी. इस पर जमकर हंगामा और विवाद भी हुआ. इसके चलते बाद में परीक्षा निरस्त ही हो गई.

2. दरोगा भर्ती घपला

उत्तराखंड पुलिस की दरोगा भर्ती पर भी विवाद खड़ा हुआ था. इस परीक्षा को लोक सेवा आयोग के जरिए कराया गया था. इस घपले का खुलासा आरटीआई के जरिए हुआ था. मेरिट लिस्ट में नाम न आने पर युवाओं ने आरटीआई के जरिए लोक सेवा आयोग से कॉपियां निकलवाई. इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय से जारी मेरिट लिस्ट में दिए गए अंकों का मिलान कराया गया. मालूम चला कि जो लोग आयोग की जांची कापियों में पास थे, उन्हें पुलिस मुख्यालय से जारी मेरिट लिस्ट में बाहर कर दिया. इस मामले में सीबीआई जांच हुई, तो एक के बाद एक परतें उधड़ती चली गई. जांच में साफ हुआ कि पुलिस मुख्यालय में कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क में छेड़छाड़ कर नंबरों में गड़बड़ी की गई. जांच के बाद ऐसे कई लोगों की नौकरी गई, जो आयोग की परीक्षा में फेल हो गए थे. हालांकि इस मामले में लिखित परीक्षा के साथ ही इंटरव्यू में भी खेल हुए. कई ऐसे युवा जो लिखित परीक्षा में बेहतर अंक लेकर आए थे, उन्हें इंटरव्यू में शून्य से लेकर
दो अंक तक दिए गए.

3. सहायक लेखाकार भर्ती घपला

पंतनगर विवि में वर्ष 2017 में सहायक लेखाकार के 93 पदों पर हुई भर्ती परीक्षा में भी घपले हुए. अनियमितता पर सरकार ने उसे रद्द किया. सहायक लेखाकार पदों पर पिछले साल भर्ती की गई थी. कृषि-उद्यान मंत्री को भर्ती में अनियमितता की शिकायत मिली थी. उन्होंने इसकी जांच बिठाई. यूएसनगर के सीडीओ की जांच मे अनियमितता की पुष्टि होने पर पूरी प्रक्रिया को निरस्त किया गया.

4. यूपीसीएल में भर्ती घपला

ऊर्जा निगम की कोई भी भर्ती पारदर्शी नहीं रही. हर बार ऊर्जा निगम द्वारा कराई जाने वाली भर्ती विवादों के बाद निरस्त हुई. राज्य में परीक्षा कराने वाली कई सरकारी एजेंसी होने के बाद भी यूपीसीएल ने हर बार गाजियाबाद की एक प्राइवेट कंपनी से परीक्षा आयोजित कराई. इस एजेंसी द्वारा कराई भर्ती परीक्षा में निगम के अफसर, कर्मचारी नेताओं के रिश्तेदार ही चुने गए. पिछली सरकार में कराई गई परीक्षा के बाद केंद्र से निकलते वक्त अभ्यर्थियों से ओएमआर शीट की कॉर्बन कॉपी भी ले ली गई. इस पर सवाल खड़े हुए थे, तो जांच बैठाई गई. जांच में भी घपले की पुष्टि पर परीक्षा को निरस्त किया गया.

5. पटवारी भर्ती घपला

राज्य गठन के बाद पहली बार हुई पटवारी भर्ती परीक्षा में जमकर घपले हुए थे. इस घपले में पौड़ी के तत्कालीन जिलाधिकारी एसके लांबा के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई तक हुई. साथ ही पूरी प्रक्रिया से जुड़े दूसरे अफसरों पर भी गाज गिरी. इस भर्ती परीक्षा में कापियां घर बैठकर जांची गई थी. मनमाने तरीके से नंबर देने का मामला सामने आया था. इसके साथ ही कई ऐसे लोगों को भी नौकरी दे दी गई थी, जिन्होंने परीक्षा के लिए आवेदन तक नहीं किया था. घपले का खुलासा होने के बाद पूरी प्रवेश परीक्षा को निरस्त किया गया था. इस घपले के चलते करीब डेढ़ दशक तक पटवारी भर्ती परीक्षा दोबारा नहीं हुई.

6. वीपीडीओ भर्ती घपला

उत्तराखंड में पिछली कांग्रेस सरकार में हुई ग्राम पंचायत विकास अधिकारी की भर्ती परीक्षा का परिणाम भी विवादों में ही घिरा रहा. विवाद बढ़ते-बढ़ते नैनीताल हाईकोर्ट तक पहुंच गया. हाईकोर्ट के दखल के बाद परीक्षा को निरस्त कर दिया गया. इस बार हुई परीक्षा में भी जमकर धांधली सामने आई है. इस बार एक ही परिवार के कई लोग प्रवेश परीक्षा में पास हो गए. एक परिवार के दो भाइयों ने पहले अलग-अलग जिलों से आवेदन किया. उसके बाद दोनों ही पास हो गए. साथ ही टॉप भी कर गए. इससे परीक्षा की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई. परीक्षा निरस्त होने के बाद दोबारा हुई परीक्षा पर भी विवाद खड़ा हो गया है. इस बार हुई प्रवेश परीक्षा में पिछली परीक्षा के प्रश्नपत्र के 40 प्रश्न ही रिपीट कर दिए गए. इसको लेकर भी युवा बेरोजगार अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं. आयोग के खिलाफ युवा बेरोजगार मोर्चा खोले हुए हैं, लेकिन अभी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

7. फार्मासिस्ट भर्ती में घपला

राज्य में लंबे समय से बेरोजगार फार्मासिस्ट वरिष्ठता के आधार पर चयन को लेकर दबाए हुए हैं. इसके बाद भी राज्य में मेरिट के आधार पर चयन नहीं किया जा रहा. पहले तो भर्ती को ही डंप किया गया. इसके बाद संविदा पर हुई भर्ती में वरिष्ठता की बजाय इंटरव्यू को चयन का आधार बनाया गया. इंटरव्यू के नाम पर चहेतों को एडजस्ट किए जाने का खेल खेलने की तैयारी की गई. बेरोजगारों ने इसे कोर्ट में चुनौती दी, तो मामला अब हाईकोर्ट में विचाराधीन है.

8. कोऑपरेटिव बैंक भर्ती घपला

राज्य गठन के बाद जिला, राज्य सहकारी बैंकों में होने वाली हर भर्ती परीक्षा में घपले हुए. पिछली सरकार में उत्तरकाशी, हरिद्वार, टिहरी, पिथौरागढ़, यूएसनगर समेत कई दूसरे बैंकों में क्लर्क, प्रबंधक, चपरासी समेत आदि पदों पर हुई भर्ती परीक्षाओं में बड़ी अनियमितताओं की शिकायतें आईं. इस पर कई बैंकों की भर्ती परीक्षा की जांच भी चल रही है. इन परीक्षाओं में अकसर सहकारी बैंकों के अध्यक्ष, पदाधिकारियों के रिश्तेदारों का ही चयन होने से सवाल उठे.