इस वजह से पीएम मोदी नहीं दे रहे हैं आंध्र प्रदेश को ‘स्पेशल स्टेट’ का दर्जा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी -फाइल फोटो

आंध्र प्रदेश को स्पेशल स्टेट का दर्जा नहीं मिलने पर बीजेपी और टीडीपी में ठनी हुई है. इस मसले पर बीजेपी की करीबी सहयोगी टीडीपी केंद्र सरकार से हटने का फैसला ले चुकी है. वहीं, बीजेपी ने भी आंध्र मंत्रिमंडल से अपने दो मंत्रियों को इस्तीफा दिलवा दिया है. विशेष राज्य के मसले पर जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर भी बीजेपी पर हमलावर है. इन सब विवादों के बीच विशेष राज्य का मसला चर्चा में है. आखिर किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा कैसे मिलता है? इसके तहत क्या लाभ मिलते हैं? आइए जानते हैं कि आखिर विशेष राज्य का स्टेट्स है क्या.

भारतीय संविधान में किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने का प्रावधान नहीं है. लेकिन यह समझते हुए कि देश के कुछ हिस्से अन्य राज्यों की तुलना में ऐतिहासिक रूप से पिछड़े हैं, केंद्र ने विशेष राज्यों को मदद देने का फैसला किया. नैशनल डिवेलपमेंट काउंसिल ने कई तथ्यों जैसे पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र, कम जनसंख्या घनत्व या बड़ा आदिवासी बहुल इलाका, अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से जुड़ी सीमा, प्रति व्यक्ति आय और गैर कर राजस्व कम के आधार पर ऐसे राज्यों की पहचान की.

विशेष राज्य के लिए शर्तें
कुछ राज्य भौगोलिक एवं सामाजिक-आर्थिक विषमताओं के शिकार हैं. इन राज्यों में ज्यादा दुर्गम पहाड़ी इलाके होने और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित होने के कारण उद्योग-धंधा लगाना मुश्किल होता है. कुछ राज्य में बुनियादी ढांचा का घोर अभाव है और आर्थिक रूप से काफी पिछड़े हैं. ऐसे में ये राज्य विकास की रफ्तार में पिछड़ जाते हैं. विकास के मार्ग पर इन राज्यों को साथ लेकर चलने के लिए विशेष राज्य का दर्जा दिया जाता है. विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के बाद केंद्र सरकार इन राज्यों को विशेष पैकेज सुविधा और यहां टैक्स में कई तरह की राहत देती है. इससे निजी क्षेत्र इन इलाकों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं जिससे इलाके के लोगों को रोजगार मिलता है और उनका विकास सुनिश्चित होता है.