पहले इतिहास पढ़े फ़ारूक़ अबदुल्ला : जीतेंद्र सिंह

जम्मू में जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश के अधिकतर मुस्लिम नहीं चाहते थे कि देश का विभाजन हो. ऐसा कुछ नेताओं के राजनीतिक स्वार्थ के कारण हुआ. प्रोग्रेसिव राइटर्स फोरम में शामिल कैफी आजमी, इसमत चुगताई व मोहसिन भोपाली ने इसका विरोध किया था.

यह मुद्दा उठाने वाले फारूक अब्दुल्ला का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि इतिहास को दोबारा पढ़ने की कोई जरूरत नहीं है. अगर नेहरू ने सरदार पटेल को जम्मू कश्मीर को देश में मिलाने के मामले में न रोका होता तो इतिहास कुछ और होता.

पटेल को यह कहकर रोक दिया गया था कि नेहरू जम्मू कश्मीर के मामले में अधिक ज्ञान रखते हैं और इसे वह खुद देखेंगे. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर को लेकर कांग्रेस की गलतियों के कारण ही राज्य में कई प्रकार की समस्याएं पैदा हुई हैं.

प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि जिन्ना ने भारत का प्रधानमंत्री बनने से इन्कार कर देश के विभाजन पर जोर दिया था.

भारत-पाक विभाजन पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला के बयान की आलोचना करते हुए प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि जम्मू संभाग में सांप्रदायिक सौहार्द कश्मीर केंद्रित पार्टियों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है. इसलिए वह ऐसे विवादास्पद बयान दे रहे हैं.

चैंबर हाउस में दिए गए बयान पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता ने कहा कि फारूक ने सिर्फ वही बात कही है जो उनके वोट बैंक को अपील करता था. फारूक पर सच्चाई छिपाने का आरोप लगाते हुए अनिल गुप्ता ने कहा कि फारूक ने जिन्ना की तारीफ करने के साथ राष्ट्रीय नेता सरदार पटेल व मौलाना आजाद पर कीचड़ उछाला है ताकि वह अपने वोटरों को खुश कर सकें और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ सकें.

गुप्ता ने कहा कि फारूक ने उस कैबिनेट मिशन का जिक्र किया जो 1946 में भारत आया लेकिन यह बताना भूल गए कि जिन्ना ने 1940 में पाकिस्तान बनाने की मांग रख दी थी. कैबिनेट मिशन ने जो प्रस्ताव रखा, उसे मुस्लिम लीग ने भी ठुकरा दिया था और कांग्रेस ने भी. यहीं से मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान के लिए लड़ाई तेज कर दी. मुस्लिम लीग के इस रवैये के चलते सांप्रदायिक हिंसा शुरू हुई और देश में कत्ले आम हुआ.

गुप्ता ने कहा कि देश में मार-काट को देखकर सरदार पटेल व मौलाना आजाद जैसे राष्ट्रवादी नेता देश का बंटवारा करने पर मजबूर हुए. उन्होंने कहा कि सब जानते है कि नेहरू और जिन्ना ने अपने स्वार्थ के लिए देश का बंटवारा किया.