SSC पेपर लीक मामला: CBI करेगी जांच, आयोग के पूर्व सचिव निशाने पर

कर्मचारी चयन आयोग पेपर लीक की जांच सीबीआई से कराने पर राजी हो गया है. सीजीओ कॉप्लेक्स स्थित एसएससी ऑफिस के बाहर छह दिन से चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के मामले को संज्ञान में लेते हुए रविवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एसएससी अध्यक्ष असीम खुराना को तलब किया. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी भी छात्रों के साथ गृह मंत्री से मिले.

केंद्रीय गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) 17 से 22 फरवरी के बीच हुई परीक्षा में कथित पेपर लीक की जांच सीबीआई से कराने पर राजी हो गया है. परीक्षार्थी कम्बाइंड ग्रेजुएट लेवल टीयर-2 की सभी परीक्षाओं की सीबीआई जांच की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. परीक्षार्थियों ने अपनी चार सूत्री मांगें नहीं माने जाने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है.

इस दौरान परीक्षार्थियों ने उन्हें अपनी मांगों से अवगत कराया. राजनाथ ने छात्रों को आश्वस्त किया कि उनके साथ कोई नाइंसाफी नहीं होने दी जाएगी. खुराना ने एक बयान जारी कर कहा कि आयोग परीक्षा में कथित रूप से पेपर लीक की सीबीआई से जांच की सिफारिश करने को तैयार है. वहीं दूसरी ओर समाज सेवी अन्ना हजारे ने भी छात्रों के बीच पहुंचकर अहिंसा का पाठ पढ़ाते हुए अपना समर्थन देने की घोषणा की.

वहीं उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुईं भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई के निशाने पर अब आयोग के कई पूर्व सचिव भी हैं. वर्ष 2012 से 2017 तक आयोग में कुल आठ सचिवों की तैनाती रही और कुछ की तैनाती पर काफी विवाद भी रहा.

यहां तक कि एक सचिव को हाईकोर्ट के आदेश पर पर से हटाया गया. साथ ही दो सचिवों के कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सबसे अधिक विवाद सामने आए. सीबीआई अब इन पूर्व सचिवों से पूछताछ की तैयारी कर रही है.

वैसे तो आयोग से जुड़े सभी निर्णय अध्यक्ष और सदस्यों की बैठक में लिए जाते लेकिन उन्हें लागू आयोग के सचिव ही करते हैं. यहां तक कि आयोग के निर्णय पर सचिव के हस्ताक्षर से ही आदेश जारी किए जाते हैं. ऐसे में अध्यक्ष एवं सदस्यों के बाद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सचिव की होती है. आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव ने जब कार्यकाल संभाला तो उस वक्त बीबी सिंह आयोग के सचिव थे लेकिन माह भर बाद ही झांसी के कमिश्नर पद पर उनका तबादला कर दिया गया.