प्रेम-संबंध में मिलेगी सफलता अगर हथेली की हृदय रेखा हो ऐसी

हृदय रेखा मनुष्य की भावनाओं के विषय में भी बताती है. किसी भी हथेली में हृदय रेखा तर्जनी उंगली या मध्यमा उंगली से शुरू होकर बुध पर्वत के नीचे तक जाती है.

हृदय रेखा मनुष्य के संतान संबंधी विषय के बारे में भी दर्शाती है. साथ ही किसी पुरुष के हाथ में हृदय रेखा संतान के जन्म का भी इशारा करती है.

हस्तरेखा शास्त्र हथेली की विभिन्न रेखाओं के अध्ययन का शास्त्र है. हथेली की प्रमुख रेखाओं में हृदय रेखा का विशेष महत्व रखती है. हृदय रेखा व्यक्ति के दिल से जुड़ी बातों के विषय में बताती है.

हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जिस इंसान हृदय रेखा तर्जनी और मध्यमा अंगुली के बीच से शुरू होती है, वह व्यक्ति निर्मल स्वभाव के होते हैं. साथ ही ऐसे लोगों का शांतिप्रिय होते हैं.

हृदय रेखा संतान के होने और न होने के बारे में बताती है. यदि हथेली की हृदय रेखा का अंतिम सिरा श्रंखलाकार हो तो यह इस बात को दर्शाता है कि व्यक्ति को संतान सुख प्राप्त होगा.

वहीं यदि यह रेखा श्रृंखलाकार नहीं है तो ऐसी स्थिति में या तो संतान नहीं होगी या फिर बहुत देरी से होगी. यह रेखा यदि दोनों हथेली पर ऐसी ही हो तो ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है.

हृदय रेखा यदि शनि पर्वत या शनि क्षेत्र से प्रारंभ होकर सूर्य पर्वत तक जा रही होती है तो व्यक्ति अत्यधिक प्रेम वासना में लीन रहने वाला माना जाता है. साथ ही व्यक्ति स्वार्थी व्यवहार का भी हो सकता है.

यदि हृदय रेखा बिना कटे-फटे एक छोड़ से शुरु होकर दूसरे छोड़ तक जाए तो व्यक्ति वर्तमान में जीने वाला स्वभाव का माना जाता है. स्वभाव से भावुक और ईर्ष्‍यालु भी हो सकता है.

हृदय रेखा का लाल होना अशुभ संकेतों को दर्शाने वाला माना जाता है. हृदय रेखा का अत्यधिक गहरा होना किसी बुरे आदत का शिकार होना दर्शाता है. ऐसी हृदय रेखा व्यक्ति को बुरे आदत का शिकार भी बना सकती है.

जिसकी हथेली में दो दो हृदय रेखा हों और उनमें किसी प्रकार का दोष ना हो तो यह व्यक्ति के सात्विक बुद्धि की मानसिकता को दर्शाती है. हृदय रेखा के बीच में टूटना प्रेम संबंधों में बिखराव को दर्शाता है.

हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा दोनों एक छोर से शुरु होकर हथेली के दूसरे छोर पर तक जाए तो यह इस बात को दर्शाता है कि व्यक्ति किसी भी चीज की परवाह करने वाल नहीं है.

यदि हृदय रेखा पतली हो और गहरी ना हो तो व्यक्ति रुष्ट स्वभाव का होता है. वहीं यदि हृदय रेखा तर्जनी अंगुली की मूल से शुरू हो तो व्यक्तिमानसिक रूप से विचलित हो सकता है.

यदि हृदय रेखा गुरु पर्वत से शुरू होती हो तो व्यक्ति निश्चयी और आशावादी स्वभाव का होता है. हथेली में हृदय रेखा न हो या बहुत छोटी हो तो यह प्रेम संबंधों में असफलता मिल सकती है.