मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2017 बगैर देरी पारित हो : रोड सेफ्टी नेटवर्क

सड़क सुरक्षा संगठनों के गठबंधन ने सरकार से आग्रह किया है कि वह मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक-2017 संसद के आने वाले सत्र में पारित करवाए.

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस विधेयक के पारित होने को देश में सड़क सुरक्षा के निराशाजनक रिकॉर्ड को बेहतर बनाने के लिए बेहद अहम बताया है. विधेयक 1988 के मोटर वाहन अधिनियम में अहम संशोधनों के लिए लाया गया है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नजदीक से निगरानी किए जाने के बावजूद सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में पिछले साल महज 3 फीसदी कमी आई है, जो सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा पर ब्रासीलिया घोषणापत्र के अनुसार तय किए गए 2022 तक 50 फीसदी के लक्ष्य से बहुत दूर है.

असल में, इस बहुत थोड़ी-सी कमी के बाद भी हिंदुस्तान की सड़कों पर हर साल 1.46 लाख लोगों को अपनी जानें गंवानी पड़ रही हैं, जिनमें से हरेक मौत अकथनीय मानव आपदा है और जिनमें से हरेक मौत को रोका जा सकता है.

रोड सेफ्टी नेटवर्क पूरी ताकत से मांग करता है कि राज्यसभा मोटर वाहन विधेयक को पारित करे, जिसका हमारी सड़कों पर होने वाले जानलेवा खून-खराबे को कम करने में अच्छा-खासा असर पड़ेगा.

उपभोक्ता हितों के लिए काम करने वाली देश की शीर्ष संस्थाओं में से एक-कंज्यूमर वॉइस के सीओओ असीम सान्याल ने कहा कि वाहनों की प्रत्येक टक्कर परिवार और समुदाय के ऊपर जख्मों के अमिट निशान छोड़ जाती है, लेकिन रोजमर्रा होने वाली ये टक्करें समाज को सुन्न बना रही हैं और इन्हें महज आंकड़ों में घटा रही हैं.

बकौल सान्याल, “लिहाजा हम सड़कों पर होने वाली भीषण टक्करों में जीवित बचे लोगों को और शिकार लोगों के परिवारों को एक साथ लाए हैं ताकि वे अपनी कहानियां बयान कर सकें और हम कहीं भूल न जाएं कि हाड़-मांस के जिंदा लोग हमारी सड़कों पर अपनी जानें गंवा रहे हैं.”

गठबंधन ने यह भी चिंता व्यक्त की कि बजट सत्र में विधेयक को पारित करवाने में सरकार की अक्षमता आने वाले चुनावों के कारण विधेयक के लिए घातक साबित हो सकती है.

गठबंधन ने कहा, ‘मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन करवा पाने में विफलता देश में सड़क सुरक्षा के मुद्दे के लिए बड़ा झटका होगी. अपनी अंतरराष्ट्रीय वचनबद्धता को पूरा कर पाने में भारत की विफलता अतीत में सड़क सुरक्षा को अपना निजी एजेंडा बनाने वाले श्री गडकरी के रिकॉर्ड पर एक बड़ा धब्बा होगी.’