मकर संक्रांति : उत्तराखंड में आज के दिन लगते हैं ये खूबसूरत मेले, इन्हें नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा

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उत्तरायणी मेला बागेश्वर

मकर सक्रांति यानी उत्तरायणी के मौके पर उत्तराखंड में जगह-जगह उत्‍तरायणी मेले और गिंडी मेलों का आयोजन होता है. खासतौर पर कुमाऊं क्षेत्र के बागेश्वर का उत्तरायणी मेला तो बहुत मशहूर है. इसके अलावा पौड़ी गढ़वाल का डाडामंडी मेला भी खासा मशहूर है.

पहाड़ों में लोगों को बड़ी बेसब्री से उत्तरायणी मेले का इंतजार होता है, फिर चाहे वह कुमाऊं हो या गढ़वाल क्षेत्र. बागेश्‍वर के अलावा हरिद्वार, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चंपावत और नैनीताल जिलों में भी इन मेलों की रौनक देखते ही बनती है.

कहने की जरूरत नहीं है कि अगर आपने ये मेले और खासकर बागेश्वर का उत्तरायणी मेला नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा. सुबह मकर सक्रांति मनाकर गांव-गांव से लोग सज-धजकर यहां पहुंचते हैं. हालांकि, बागेश्वर में यह मेला सात दिन तक चलता है, लेकिन मकर सक्रांति के दिन इसका खास महत्व होता है. इन मेलों में जबरदस्त सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है.

बागेश्‍वर उत्तरायणी मेला देखने के लिए प्रेमिका को मनाता हुआ एक गाना…

उत्‍तरायणी मेला, बागेश्‍वर:
बागेश्‍वर में सरयू और गोमती नदी के तट पर हर साल मकर सक्रांति के मौके पर उत्तरायणी मेले का आयोजन होता है. यह मेला भगवान शिव के बागनाथ मंदिर के पास आयोजित होता है. माना जाता है कि इस दिन बागेश्वर के संगम में स्नान करने से समस्त जीवन के पापों का नाश हो जाता है.

कितने दिन का आयोजन: बागेश्‍वर में आयोजित होने वाला उत्तरायणी मेला 1 हफ्ते तक चलता है और भारी संख्या में लोग इस मेले में शामिल होने के लिए पहुंचते हैं.

कितनी दूर: बागेश्‍वर का नजदीकी पंतनगर एयरपोर्ट यहां से 180 किमी दूर उधमसिंह नगर जिले में है. नजदीकी रेलवे स्‍टेशन करीब 160 किमी दूर नैनीताल जिले के काठगोदाम में है. बागेश्‍वर सड़क मार्ग से भी उत्तराखंड और देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा है.

कुछ प्रमुख नगरों से बागेश्‍वर की दूरी…

शहर दूरी   शहर दूरी
लखनऊ 556 किमी आगरा 499 किमी
नैनीताल 153 किमी ऋषि‍केश 290 किमी
दिल्ली 470 किमी पानीपत 468 किमी
हरिद्वार 309 किमी अंबाला 476 किमी
देहरादून 328 किमी चंडीगढ़ 493 किमी
अल्मोड़ा  76 किमी शि‍मला 556 किमी
काठगोदाम 185 किमी जयपुर 720 किमी
हल्द्वानी 194 किमी पौड़ी 214 किमी
रानीखेत 104 किमी चंपावत 179 किमी
मुरादाबाद 279 किमी कॉर्बेट नेशनल पार्क 286 किमी
पिथौरागढ़ 149 किमी कौसानी  40 किमी


क्या है खास:
बागेश्‍वर में सरयू-गोमती और गुप्‍त भागीरथी के संगम तट पर प्राचीन बागनाथ मंदिर के पास उत्‍तरायणी मेले का आयोजन होता है. मकर सक्रांति के अवसर पर लगने वाले इस मेले में सांस्‍कृतिक आयोजन तो होते ही हैं, साथ ही यह व्‍यापार का केंद्र भी होता है.

रंग यात्रा से साथ शुरू होता है बागेश्वर का उत्तरायणी मेला

मेले के दौरान खास तौर पर मकर सक्रांति के दिन संगम पर स्नान करने वालों की भारी भीड़ जुटती है. श्रद्धालु यहां आकर जनेऊ सरंकार, मुंडन, स्‍नान और पूजा-अर्चना करते है। मैदानी भागों से भी हजारों की संख्या में लोग मकर सक्रांति के दिन संगम में डुबकी लगाने यहां पहुंचते हैं. इसके अलावा एक हफ्ते तक चलने वाले मेले में शामिल होने के लिए भी लोग दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं.

मेले में बाहर से आए कलाकार खास किस्म के नाटकों का मंचन करते हैं, जबकि स्थानीय कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय संस्कृति की झलक दिखाते हैं और सबका ध्यान अपनी ओर आकर्ष‍ित करते हैं. स्‍कूल-कॉलेजों से आए छात्र भी यहां रंगारंग कार्यक्रम पेश करते हैं.

इतिहास: बागेश्‍वर के इस मेले का स्‍वतंत्रता आंदोलन से लेकर समय-समय पर होने वाले स्थानीय आंदोलनों तक बहुत महत्‍व रहा है. 1921 में बधुआ मजदूरी के ख‍िलाफ यहीं से हुंकार भरी गई थी, उस आंदोलन को आज भी ‘कुली बेगार’ के नाम से जाना जाता है. 1929 में महात्‍मा गांधी भी बागेश्‍वर आए.

छोलिया नृत्य यानी सरंकार तो उत्तरायणी मेले की जान है…

सन 1602 में उस समय कुमाऊं में चंद वंशी राजा लक्ष्‍मी चंद ने बागेश्‍वर में शिव मंदिर का निर्माण करवाया था, हालांकि इतिहास की शुरुआत से ही इस जगह का महत्‍व है. मंदिर में 7वीं से लेकर 16वीं शताब्‍दी तक की मूर्तियां हैं. माना जाता है कि मार्कंडेय ऋष‍ि यहां रहा करते थे और भोले बाबा बाघ (Tiger) के रूप में यहीं विचरण करते थे, जिसके कारण इस जगह का नाम बागेश्वर पड़ा.

सु‍विधाएं: बागेश्‍वर एक जिला मुख्यालय है और यहां पर सभी तरह की आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं. रेस्टोरेंट, बैंक, पी.सी.ओ., डाकघर आदि हर चीज की सुविधा यहां है. मेले के दौरान यहां खास तरह के आयोजन किए जाते हैं. ये हैं बागेश्वर में ठहरने के लिए कुछ सरकारी गेस्ट हाउस.

1. P.W.D. निरीक्षण भवन (इंस्‍पेक्‍शन हाउस) बागेश्‍वर
2. फॉरेस्‍ट रेस्‍ट हाउस (वन विश्राम गृह)
3. जिला पंचायत डाक बंगला
4. पर्यटक स्वागत केन्द्र, कुमाऊं मंडल विकास निगम

मुसीबत में यहां संपर्क करें:

जिला प्रशासन
कलेक्ट्रेट, बागेश्वर उत्तराखंड, भारत-263 642.
जिलाधिकारी:
मोबाइल नंबर: 9412007777
फोन: 5963-220763, फैक्‍स: 5963-220328
ई-मेल पता: – uabag@nic.in

पुलिस सुप्रीटेंडेंट
मोबाइल नंबर: 9411111952
फोन नंबर: 05963-220382

जिला पर्यटन अधिकारी, बागेश्वर
फोन नंबर: 05963-221562

कांकर, चंपावत
चंपावत में शारदा नदी के किनारे कांकर है. यह जगह टनकपुर से सिर्फ 5 किमी दूर है और यहां पर हर साल उत्तरायणी मेले का आयोजन होता है. टनकपुर भारतीय रेल के नेटवर्क से जुड़ा है. कांकर एक अति प्राचीन यज्ञ स्‍थल है. यहां आज भी प्राचीन हवन कुंड आदि दिखाई देते हैं. उत्‍तरायणी के मौके पर यहां हवन, मुंडन व जनेऊ का खास महत्‍व है. पुराणों के अनुसार सृष्‍टिकर्ता ब्रह्मा ने यहां एक यज्ञ किया था, जिसमें सभी देवी-देवता पहुंचे थे.

गिंडी मेला:
गिंडी मेले पर गढ़वाली लोकगायक गजेंद्र राणा का एक बेहतरीन गीत…

गढ़वाल और खासतौर पर पौड़ी में मकर सक्रांति के दिन गिंडी मेलों का आयोजन होता है. उत्‍तरायणी के दिन पौड़ी गढ़वाल जिले के डाडामंडी, थलनदी, त्योरू गाड़ (नीलकंठ महादेव), यमकेश्वर, कटघर श‍िवालय आदि जगहों पर इन मेलों का आयोजन होता है. गिंडी मेलों का गढ़वाल में बहुत महत्व है.

डाडामंडी, कटघर और थलनदी के गिंडी मेले खासे मशहूर हैं. लोग दूर-दूर से इन मेलों में शामिल होने के लिए पहुंचते हैं. ये मेले वीरता, खुशी और दिलेरी के परिचायक होते हैं. मेले में गांव के लोग एक मैदान में इकट्ठा होते हैं और दो हिस्सों में बंट जाते हैं. दोनों टीमों के सदस्य एक गेंद को अपनी तरफ करने की कोश‍िश करते हैं.

पहाड़ी समाज के लोग दिल्ली के संत नगर बुराड़ी में भी आयोजित करते हैं उत्तरायणी मेला. 2003 में आयोजित हुए इस मेले की एक झलक…