साल 2017: बड़े सितारों के बजाय नये चेहरों से सजी छोटी फिल्मों का रहा यह साल

‘बाहुबली 2’, ‘गोलमाल अगेन’ और इसी शुक्रवार को रिलीज हुई ‘टाइगर जिंदा है’ जैसी कुछ फिल्मों को छोड़ दें तो 2017 ज्यादातर उन फिल्मों का रहा जिनमें सीधी-सच्ची और भारत के छोटे शहरों से जुड़ी कहानियां कही गयीं.

कई बार ऐसा हुआ कि नये चेहरों से सजी छोटी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस और समीक्षकों, दोनों ही मोर्चों पर तथाकथित मुख्यधारा के सिनेमा या बड़े सितारों की व्यावसायिक फिल्मों को पीछे छोड़ दिया.

फिल्म एक्जिबिटर अक्षय राठी ने पीटीआई से कहा, ‘बॉक्स ऑफिस के लिहाज से देखें तो 2017 खराब साल रहा. फिल्म उद्योग के लिए यह समझने का वक्त है कि उन्हें दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए गंभीरता से काम करना होगा और उन्हें वो सिनेमाई अनुभव देना होगा जिसके लिए वे पैसा देते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘इस साल देखा गया कि स्क्रिप्ट दरअसल ज्यादा महत्वपूर्ण है, ना कि बड़े सितारे. कुछ फिल्मों में कोई नामी चेहरा नहीं था लेकिन अच्छी विषयवस्तु की वजह से उनका प्रदर्शन शानदार रहा.’ साल की शुरूआत रितिक रोशन की ‘काबिल’ और शाहरुख खान की ‘रईस’ की टक्कर के साथ हुई. दोनों ने बॉक्स ऑफिस पर संतोषजनक कारोबार किया.

अक्षय कुमार अभिनीत ‘जॉली एलएलबी 2’, वरुण धवन और आलिया भट्ट की ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’, इरफान खान और पाकिस्तानी अभिनेत्री सबा कमर की ‘हिंदी मीडियम’ और श्रीदेवी की ‘मॉम’ कम बजट की सफल फिल्मों में गिनी गयीं. अक्षय ने ‘टॉयलेट-एक प्रेम कथा’ के साथ अच्छा कारोबार किया.

इसके अलावा ‘बरेली की बर्फी’, ‘शुभ मंगल सावधान’ के साथ ही राजकुमार राव की ‘न्यूटन’ भी दर्शकों को पसंद आईं. ‘न्यूटन’ को 90वें एकेडमी अवार्ड में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा वाली फिल्म के रूप में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में भेजा गया था.

राठी ने कहा कि यह साल सीक्वल वाली फिल्मों के लिए भी रहा. ‘बाहुबली: द कनक्लूजन’, ‘जॉली एलएलबी 2’, ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’, ‘गोलमाल अगेन’ और ‘फुकरे रिटर्न्स’ इनमें शामिल हैं.

साल 2017 बॉक्स ऑफिस पर जमकर कमाई कर रही सलमान खान और कैटरीना कैफ की ‘टाइगर जिंदा है’ के साथ समाप्त हो रहा है. रिलीज के चौथे दिन फिल्म 150 करोड़ रुपये की कमाई के आंकड़े को पार कर चुकी है.

‘एक था टाइगर’ की सीक्वल और अली अब्बास जफर निर्देशित ‘टाइगर जिंदा है’ सलमान के लिए राहत लेकर आई है जिन्हें इस साल ‘ट्यूबलाइट’ की नाकामी ने निराश कर दिया था.

राठी के अनुसार इस साल अब तक सबसे अधिक कमाई वाली फिल्म ‘बाहुबली’ है जिसने भारत में हिंदी, तमिल और तेलुगू भाषाओं में 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाये. ‘गोलमाल अगेन’ ने करीब 210 करोड़ रुपये की कमाई की है.

‘सरकार’ सीरीज की तीसरी फिल्म ने कुछ खास नहीं किया और 2015 की ‘बेबी’ की पृष्ठभूमि पर आधारित ‘नाम शबाना’ को भी अपेक्षाकृत कम दर्शक मिले.

कुछ जीवनी आधारित फिल्में भी इस साल बॉलीवुड का हिस्सा बनीं. जिनमें अंडरवर्ल्ड डॉन से नेता बने अरुण गवली पर बनी ‘डैडी’, ‘हसीना पारकर’ और माउंट एवरेस्ट पर सबसे कम उम्र में चढ़ने वाली लड़की के जीवन पर बनी ‘पूर्णा : करेज हैज नो लिमिट’ है. हालांकि ये भी कमाल नहीं दिखा सकीं. सचिन तेंदुलकर पर बनी ‘सचिन : ए बिलियन ड्रीम्स’ को जरूर दर्शकों का प्यार मिला.

फ्लॉप फिल्मों में ‘रंगून’, ‘फिल्लौरी’, ‘मातृ’, ‘बेगम जान’, ‘नूर’, ‘हाफ गर्लफ्रेंड’, ‘राबता’, ‘ए जेंटलमैन’, ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’, ‘पोस्टर ब्वॉयज’ की लंबी फेहरिस्त है.

कुछ ऐसी फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर गयीं जिनसे बहुत उम्मीद लगाई गयी थीं. इनमें ‘जग्गा जासूस’, ‘जब हैरी मेट सेजल’, संजय दत्त की वापसी वाली ‘भूमि’, ‘सिमरन’ और ‘शेफ’ हैं.

फिल्म और संगीत विश्लेषक राजीव विजयकर के मुताबिक हिंदी सिनेमा आज इसलिए भी संघर्ष कर रहा है क्योंकि यह दर्शकों को आकर्षित करने के अपने सबसे बड़े हथियार ‘संगीत’ पर पकड़ कम करता जा रहा है.