अत्यधिक जोखिम वाले 10 जिलों में आपदा जोखिम कम करने पर काम कर रहा NDMA

सरकार ने संसद की एक समिति को बताया है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) दस अत्यधिक संवेदनशील जिलों में आपदा जोखिम में कमी संबंधी परियोजना को क्रियान्वित कर रहा है, साथ ही बाढ़ की सर्वाधिक आशंका वाले 30 जिलों में स्वयंसेवियों को प्रशिक्षित करने की योजना को भी मंजूरी दी गई है.

लोकसभा में पेश गृह मंत्रालय के आपदा प्रबंधन प्रभाग की याचिका समिति की रिपोर्ट में बताया गया कि असम, बिहार, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड राज्यों में से दो-दो जिलों में इस परियोजना को क्रियान्वित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य समुदाय तथा स्थानीय शासन का सुदृढ़ीकरण करना और आपदाओं के प्रति उनकी तैयारी एवं कार्रवाई को सुदृढ़ करना है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि एनडीएमए ने वर्ष 2016-18 के दौरान बाढ़ की सर्वाधिक आशंका वाले 30 जिलों में 6000 स्वयंसेवियों को प्रशिक्षित करने की योजना को मंजूरी दी है.

इसमें बताया गया कि एनडीएमए ने ‘समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन’ संबंधी दिशानिर्देशों का मसौदा तैयार कर लिया है जिसके तहत आपदा संबंधी तैयारी एवं कार्रवाई के लिए स्थानीय युवाओं को एकजुट एवं सक्रिय करना और उनका क्षमता निर्माण करना है.

समिति की सिफारिशों पर गृह मंत्रालय के आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि सिविल डिफेंस स्वयंसेवियों की अतिरिक्त भूमिका के रूप में ‘आपदा प्रबंधन’ को शामिल करने के लिए 2009 में सिविल डिफेंस अधिनियम में संशोधन किया गया था.

इसके तहत जिले के ग्रामीण या स्थानीय युवकों को स्वयं सेवा के आधार पर आपदा प्रबंधन के लिए जिले के सिविल डिफेंस यूनिट में अपना नाम दर्ज करवाने का विकल्प प्राप्त है.

मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2017 में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने 483 सामुदायिक जागरुकता कार्यक्रम तथा 280 विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था, जिनमें क्रमश: दो लाख 99 हजार 984 लोगों तथा एक लाख 40 हजार 410 स्कूली बच्चे एवं कर्मचारी शामिल हुए.