नोटबंदी ने कसा कालेधन पर शिकंजा, 91 लाख नए टैक्सपेयर्स जुड़े

प्रतीकात्मक फोटो

बुधवार को टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से जारी आंकड़ों से कई दिलचस्प बाते सामने आई है. मोदी सरकार के पहले दो साल में छूट और मामूली वृद्धि की वजह से डायरेक्ट टैक्सपेयर्स बेस में धीमी रफ्तार से वृद्धि हुई, लेकिन नोटबंदी के बाद इस ट्रेंड में बदलाव की उम्मीद है. इसमें बताया गया है कि रिटर्न फाइल करने वाले आधे भारतीय जीरो इनकम टैक्स देते हैं.

आंकड़ों के अनुसार टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन 2012-13 से 4 साल तक इसकी रफ्तार कम रही और केवल 54 लाख नए टैक्सपेयर्स जुड़े. 2013-14 में केवल 5.4 करोड़ टैक्स पेयर्स थे, जो मोदी के सत्ता संभालने के बाद 2015-16 तक इनकी संख्या बढ़कर केवल 5.93 करोड़ हुई यानी केवल 53 लाख का इजाफा, लेकिन नोटबंदी के बाद कम से कम 91 लाख नए टैक्सपेयर्स जुड़े हैं.

वित्त वर्ष 2014-15 में 4.1 करोड़ भारतीयों ने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया, लेकिन इसमें से 2 करोड़ लोग ऐसे थे जिन्होंने दावा किया कि उनकी आमदनी पर जीरो टैक्स बनता है. दूसरे 2 करोड़ लोगों ने औसतन सालाना 42,456 रुपये इनकम टैक्स चुकाया. केवल 1 करोड़ टैक्सपेयर्स ने 1 लाख से अधिक टैक्स दिया.

कुल डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में दिल्ली और महाराष्ट्र का योगदान 50 फीसदी है, यानी सर्वाधिक टैक्स चुकाने वाले नागरिक इन्हीं 2 राज्यों से हैं. सर्वाधिक 37% टैक्स महाराष्ट्र से आता है. दूसरे नंबर पर दिल्ली है जहां से 12.8 फीसदी टैक्स की प्राप्ति होती है. टॉप 10 में इन दो राज्यों के बाद कर्नाटक (10.1%) , तमिलनाडु (7.1%), गुजरात (4.6%), आंध्र प्रदेश (4.3%), पश्चिम बंगाल (4.1%), यूपी (3.5%), हरियाणा (2.4%) और राजस्थान (2.4%)है. हैरानी की बात है कि भारत के सबसे अमीर राज्यों में शामिल पंजाब टैक्स के मामले में टॉप 10 में भी नहीं है.

टैक्स कलेक्शन में तेलंगाना का योगदान तेजी से बढ़ रहा है. 3 साल में, 2014-15 से 2016-17 के बीच तेलंगाना में इनकम टैक्स कलेक्शन दोगुना हो चुका है. इसके साथ ही मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और मणिपुर इनकम टैक्स में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज करने वाले राज्य हैं. 2015-16 के बीच देश में केवल एक टैक्सपेयर ने 100 करोड़ से अधिक टैक्स दिया है और यह कुल राशि 238 करोड़ रुपये है. हालांकि इस टैक्सपेयर का नाम नहीं बताया गया है. 3 लोगों ने 50 से 100 करोड़ रुपये के बीच टैक्स दिया है. वहीं, 1 करोड़ से 50 करोड़ के बीच टैक्स देने वालों की संख्या 9,686 है.

टैक्स निर्धारण वर्ष 2015-16 में ऐसे टैक्सपेयर्स की संख्या में 23.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जिन्होंने अपनी टैक्स रिटर्न में 1 करोड़ रुपये से अधिक की आमदनी की घोषणा की. करोड़पतियों की संख्या में इजाफा हुआ है, लेकिन इससे पिछले साल की तुलना में उनकी कुल आमदनी में 50,889 करोड़ रुपये की कमी आई है. 59,830 लोगों ने अपनी आय को 1 करोड़ रुपये से अधिक बताया है.