भारत का यह समाज सफेद चादर बिछा आज भी करता है सुहागरात से पहले ‘वर्जिनिटी टेस्ट’

भारत देश आधुनिकता की ओर मुखर है लेकिन इसे कई समाज आज भी हमारे देश में फैले हुए हैं जिन्होंने रुदिवादिताओं की सारी हदें पार कद दी हैं. ऐसा ही एक समाज है कंजारभाट समाज.यहां आज भी शादी के बाद रूढ़िवादी परंपरा ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ से कपल्स को गुजरना पड़ता है.इस ‘टेस्ट’ से इनकार किया तो समाज से बाहर निकाल दिया जाता है।

ऐसे ही एक शादीशुदा जोड़े को 10 साल पहले इस टेस्ट से इनकार के बाद समाज से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था.आज यह कपल वॉट्सऐप के जरिए अब इस समाज के लोगों में जागरूकता पैदा करने की कोशिश कर रहा है.

कंजारभाट समाज की इस ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ परंपरा के तहत सुहागरात के समय पंचायत के लोग बेडरूम के बाहर बैठते हैं.बिस्तर पर सफेद चादर बिछा दी जाती है.अगली सुबह अगर चादर पर ‘खून’ दिखा तो ठीक नहीं तो फिर दुल्हन पर कई तरह के आरोप लगने शुरू हो जाते हैं.उसे वर्जिन ही नहीं माना जाता.समाज की इस रूढ़िवादी परंपरा के कारण कई परिवारों में मुश्किल स्थिति भी पैदा हो चुकी है.

वर्ष 1996 में कृष्णा इंद्रेकर और अरुणा इंद्रेकर ने शादी की.बाद में उन्होंने पंचायत की इस रूढ़िवादी परंपरा को मानने से इनकार कर दिया था.इसके बाद पंचायत की फरमान पर उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया.

हिंदी दैनिक नवभारत टाइम्स के अनुसार कृष्णा ने बताया, ‘इस रूढ़िवादी परंपरा के खिलाफ हमारी जंग पिछले 20 साल से जारी है.हमने कई बार पंचायत और समाज के लोगों को इस तरह की रूढ़िवादी मानसिकता से बाहर निकालने की कोशिश की.हमारा प्रयास लगातार जारी है.आज इस समाज के युवा लगातार विकास के पथ पर हैं.प्रगतिशील क्षेत्रों में काम कर रहे हैं.बावजूद इसके समाज का एक तबका अभी भी उन्हीं पुरानी परंपराओं से जकड़ा है और इसका असर कहीं न कहीं समाज से आने वाले सभी लोगों पर पड़ रहा है.इसे जड़ से खत्म करने के लिए यह लड़ाई जारी रहेगी।’

अरुणा कहती हैं, ‘इस तरह से पंचायत के फरमान पर वर्जिनिटी टेस्ट कराना सरासर महिला अधिकारों का हनन है.इस अन्याय को रोकने के लिए हम सभी को मिलकर कदम उठाना ही होगा।’ कृष्णा ने बताया कि आज 40 लोगों का एक ग्रुप वॉट्सऐप पर जुड़ा है.इस ग्रुप का नाम है ‘Stop the VRitual’.इसके तहत इस समाज के अधिक से अधिक लोगों को जोड़कर इस रूढि़वादी परंपरा के खिलाफ जागरूकता पैदा करने की कोशिश की जा रही है.

हालांकि इस वॉट्सऐप ग्रुप में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं.कुछ परिवार के लोगों को जानकारी मिलने के बाद संबंधित महिलाओं को लगातार धमकी दी जा रही है कि वे ग्रुप से बाहर निकल जाएं.कृष्णा ने कहा कि इस तरह की दिक्कतें तो आएंगी लेकिन हमारा लक्ष्य बढ़ा है तो मुश्किलों के बावजूद संघर्ष जारी रखना है.