बढ़ती ठंड बीमारियों को दे सकती है दावत, रखे अपना ख्याल

इस समय अस्पतालों में बड़ों से ज्यादा अभिभावक अपने बच्चों के इलाज के लिए अस्पताल रहे हैं और उनमें से अधिकतर बच्चे सांस की बीमारी से पीड़ित हैं. ठंड की शुरुआत होने के साथ ही सर्दी जनित बीमारियों ने सिर उठाना शुरू कर दिया है. जैसे जैसे सर्दी बढ़ रही है वैसे वैसे सर्दी ने छोटे बच्चों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है. ठंड के कारण सर्दी लगने, जुकाम और खांसी की शिकायतें लेकर लोग डाक्टरों के पास पहुंचने लगे हैं.

सर्दी का मौसम डाइबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दमा के मरीजों के लिए भी सर्दी मुसीबत बन सकता है. अभी भले ही सर्दी ने जोर नहीं पकड़ा है मगर सर्दी का मौजूदा मौसम भी बीमार करने के लिए काफी है. डाक्टरों के अनुसार शुरुआती सर्दी को हल्के में नहीं लेना चाहिए. शुरुआती ठंड ही लोगों को बीमार करने का कारण बनती है.

मौसम के बदलते मिजाज से दिनचर्या प्रभावित हो रही है. जहां दिन में अभी सर्दी नहीं पड़ रही है, वहीं रात और सुबह के समय ठंड पड़ रही है. दिन में ठंड नहीं होने से लोग लापरवाही बरत रहे हैं. दिन में लोग घर से कम कपड़े पहन कर निकलते हैं और शाम को घर पहुंचते पहुंचते मौसम ठंडा हो जाता है. इसके चलते मौसमी बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या बढने लगी है.

डाक्टरों के अनुसार ठंड का मौसम जुकाम और फ्लू का मौसम होता है. जुकाम, खांसी और फ्लू के मामले इन दिनों बढने लगते हैं. हवा में मौजूद नमी के जरिए खांसी का संक्रमण आसानी से फैल सकता है और दूसरों को संक्रमित कर सकता है. 80 प्रतिशत संक्रमण सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से ही फैलते हैं. अस्पताल में भर्ती होने वाले ज्यादातर लोग खांसी, छाती जमने, गला खराब होने और जुकाम के दूसरे लक्षणों के ही शिकार हो जाते हैं.

डाक्टरों के अनुसार जब हम खांसते या छींकते हैं तो सांस प्रणाली में मौजूद गंदगी को बाहर निकालते हैं जो बेहद महीन बूंदें भी हो सकती हैं या हवा युक्त नमी के कण हो सकते हैं जो पांच माइक्रोन से भी छोटे होते हैं. दोनों के अपने अपने प्रभाव होते हैं. डाक्टरों के अनुसार सर्दी में स्वस्थ बने रहने के लिए विशेष ऐहतियात बरतने चाहिए क्योंकि सर्दी में होने वाली बीमारियों के लगातार बढने और पनपने का खतरा बना रहता है.

ऐसे में सही समय पर सही इलाज आवश्यक है. डाक्टरों के अनुसार सर्दी में खून का प्रवाह अवरुद्ध होने से हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों में लकवे का खतरा बढ़ जाता है. इससे बचने के लिए समय समय ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहना जरूरी है. दमे के मरीजों को भी विशेष ऐहतियात बरतने की जरूरत है.

ठंड के चलते दमे के मरीजों में दौरे पडने की आशंका बढ़ जाती है. ऐसे मरीज अपनी दवाएं और इन्हेलर हमेशा अपने साथ रखें. ठंड के चलते धमनी सिकुडने से हार्ट अटैक का भी खतरा बना रहता है. हार्ट और रक्तचाप के मरीजों को सुबह एकदम से ठंड में बाहर न जाना चाहिए.

बिस्तर से उठने से पहले गर्म कपड़े पहने और थोड़ा व्यायाम करते हुए उठना चाहिए. सिर, हाथ पैर को पूरी तरह से ढक कर चलना चाहिए. खानपान में भी इस मौसम में ध्यान देना चाहिए. इन दिनों सर्दी, जुकाम, बुखार के मरीज बढ़े हैं. जब भी मौसम परिवर्तन होता हैए सर्दी, जुकाम और बुखार का प्रकोप हो जाता है. ऐसे मौसम में सतर्कता बरतने की जरूरत है. ठंडी हवाओं से बचना चाहिए. एकदम से गर्म कमरे से बाहर ठंड में नहीं निकलना चाहिए. खान पान का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. बाहर की चीजों से परहेज करना चाहिए. सावधानी रख कर मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है.

लक्षण:-

1. गले में घरघराहट,
2. नाक बंद हो जाना,
3.सर दर्द होना,
4. चिडचिड़ाहट होना,
5.हल्का हल्का बुखार होना,
6.आवाज में घरघराहट,
7. छींकना,
8.स्वाद और सुगंध की अनुभूति कम होना,
9.खांसी होना

बचाव:-

1 सामान्य रूप से लोग सर्दी होने पर ऐंटीबायॉटिक्स का प्रयोग करते हैं, लेकिन बिना डाक्टर कि सलाह के इसे लेना जानलेवा भी साबित हो सकता है.
2 यहां यह भी जान लेना आवश्यक है कि ऐंटीबायॉटिक्स बैक्टीरिया के विरुद्ध कार्य करते हैं न कि वायरस और अलर्जी के विरुद्ध. इसलिए सामान्य सर्दी जुखाम जो कि वायरस या अलर्जी के कारण हो रहे हैं, उनमें ये दवाएं लेने का कोई लाभ नहीं होता है.
3 सामान्य रूप में इस रोग से बचाव के उपाय ही इसका उचित इलाज है.
4 जिन लोगों को सर्दी है, उनसे उचित दूरी बनाकर रखें. खास तौर पर तब जब वे खांसें या छींके.
5 सही समय पर संतुलित भोजन करें.
6 ठंडा व बासा भोजन न करें.
7 भोजन व पेय पदार्थों में सोंठ और काली मिर्च का प्रयोग अवश्य करें.
8 छींकते व खांसते समय मुंह व नाक को ढककर रखें.
9 भोज्य पदार्थों को ढककर रखें.
10 पर्याप्त मात्रा में यदि मन न हो तब भी पानी अवश्य पियें.
11 आराम अवश्य करें क्योंकि इससे ऊर्जा का संग्रहण होता है.
12 भोजन में विटामिन सी युक्त पदार्थ जैसे नींबू का प्रयोग करें.
13 यदि सर्दी के लक्षण तीन दिन से ज्यादा रहे तो चिकित्सक से परामर्श करें.
14 यदि छाती में दर्द हो, लगातार खांसी आए, कान में दर्द हो या बलगम भूरा या लाल रंग का आता हो तो डाक्टर से परामर्श करें.
15 अगर आप अस्थमा से पीड़ित हैं तो कुछ भी उपाय करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें.
16 अगर कोई छोटा बच्चा सर्दी से पीड़ित है तो भी डाक्टर की सलाह अवश्य लें