नौसेना को मिली INS कलवरी पनडुब्बी, पीएम ने बताया ‘Make In India’ का उदाहरण

मुंबई, भारतीय नौसेना में तैनात की जाने वाली छह स्कार्पीन वर्ग की पहली पनडुब्बी ‘कलवरी’ को पीएम मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया. इस दौरान आयोजित समारोह में पीएम मोदी ने कहा, INS कलवरी पनडुब्बी को राष्ट्र को समर्पित करना, मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है. उन्होंने देश की जनता की तरफ से भारतीय नौसेना को भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं अर्पित की. पीएम मोदी ने कहा कि “आज सवा सौ करोड़ भारतीयों के लिए बहुत गौरव का दिन है. मैं सभी देशवासियों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं.

प्रधानमंत्री ने कलवरी को ‘Make In India’ का उत्तम उदाहरण कहा. उन्होंने यह भी कहा, समुद्र के रास्ते आतंकवाद हो, ड्रग तस्करी हो या गैरकानूनी मछली पकड़ना, भारत इन सबसे निपटने में अहम भूमिका निभाता रहा है. पिछले तीन साल में रक्षा और सुरक्षा से जुड़े पूरे इको सिस्टम में बदलाव की शुरुआत हुई है. इस साल जम्मू कश्मीर में 200 से ज्यादा आतंकी मारे गए.” समारोह में सबसे पहले नियुक्ति पत्र पढ़ा गया, तिरंगे को फहराकर और राष्ट्रीय गान के साथ इस प्रक्रिया को शुरु किया गया. समारोह में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा, वाइस एडमिरल गिरीश लूथरा, पश्चिमी नौसेना कमान के कमांडिंग ऑफिसर और शीर्ष रक्षा अधिकारी शामिल हुए.

पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक भागीदारी का यह बेहतर उदाहरण है. उन्होंने कहा कि इसे मैं एक खास नाम से बुलाता हूं. SAGAR जिसका मतलब है, SECURITY AND GROWTH FOR ALL IN THE REGION. उन्होंने यह भी कहा कि ”यह हमारा ही वादा था जिसके कारण कई दशकों से लंबित ‘वन रैंक वन पेंशन’ का वादा अब हकीकत में बदल चुका है.” अधिकारी ने बताया, “कलवरी को 120 दिनों के व्यापक समुद्री परीक्षणों और विभिन्न उपकरणों के परीक्षणों के तहत लिया गया है.” उन्होंने कहा, इस जहाज से देश का समुद्री कौशल मजबूत करने की संभावना है.

भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट -75 के तहत माजगॉन डॉक लिमिटेड (एमडीएल) ने मुंबई में फ्रैंच नौसैनिक रक्षा और ऊर्जा कंपनी डीसीएनएस द्वारा तैयार की गई पनडुब्बियों का निर्माण किया है. “इसमें उपयोग की जाने वाली तकनीक उत्तम किस्म की है. अधिकारियों के अनुसार, इसमें एकॉस्टिक गुणवत्ता, कम विकिरणित शोर स्तर, हाइड्रो-डायनामिक रूप से अनुकूलित आकार और सटीक निर्देशित हथियारों का उपयोग करते हुए दुश्मन पर हमला करने की क्षमता शामिल है. कलवरी का नाम एक खतरनाक टाइगर शार्क के नाम पर रखा गया है, जो हिंद महासागर के गहरे समुद्र में पाया जाता है. 8 दिसंबर, 1967 को शुरु किया गया पहला कलवरी, भारतीय नौसेना की पहली पनडुब्बी भी थी. लगभग तीन दशकों की सेवा के बाद इसे 31 मई, 1996 को समाप्त कर दिया गया था.