उत्तराखंड का एक ऐसा गांव जहां 20 प्रतिशत महिलाएं विधवा हैं!

सांकेतिक चित्र

इसी सिद्धांत के आधार पर समाज में लोगों ने अपने बच्चों के नाम के साथ महान लोगों का नाम जोड़ने की परंपरा शुरू की होगी. उत्तरकाशी जनपद के चिन्यालीसौड़ तहसील में एक ऐसा गांव है जिसका नाम है मर गांव. गांव का नाम मर गांव क्यों पड़ा यह आज तक कोई नहीं जानता लेकिन इस श्रापित नाम से लोग आज भी सहमे हुए हैं.

दरअसल गांव में लगातार होते हादसों से मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है. सड़क निर्माण से पहले भी पहाड़ियों से गिर कर कई लोगों की मौत हुई है जिसका आंकड़ा सोचने पर विवश करता है. सड़क हादसों में अन्य गावों की तुलना मैं मर गांव से मरने वाले लोगों की मौत का रहस्य आज भी समझ से परे है.

थाना धरासु के इंस्पेक्टर रवीन्द्र यादव के अनुसार मर गांव के सामने धरासु बैंड से नालुपानी के बीच विगत दो सालों में ही सड़क हादसों में करीब 30 लोग मारे गए हैं. यह आंकड़ा केवल वर्ष 2016 और 2017 का है. अगर पिछले सालों को भी जोड़ दें तो स्थिति समझी जा सकती है.

इलाके में लंबे समय से पहाड़ी से भूधंसाव भी हो रहा है लिहाजा पुलिस की तरफ से भी सड़क निर्माण करने वाली संस्था बीआरओ को उक्त स्थान पर सूचना पट लगाने और अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही इलाके मे पुलिस की अलग टुकड़ी भी लगातार गश्त पर रहती है.

पूर्व प्रधान बिशन सिंह के अनुसार गांव में 20 प्रतिशत महिलाएं विधवा हैं. गांव तक सड़क आने से पहले संकरे पैदल मार्ग हादसों का कारण रहे हैं किन्तु अब सड़क तैयार होने के बाद भी सड़क हादसों में इजाफा जारी है. मर गांव के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा भी दुर्घटनाओं के लिहाज से अतिसंवेदनशील है.

गांव के कारपेंटर सुंदर सिंह हादसों में मरने वालों के नाम गिनाते हुए कहते हैं कि न जाने क्यों यहां हादसे नहीं रुकते. सुंदर सिंह के अनुसार कुछ कहते हैं कि राजमार्ग का यह हिस्सा सही ढंग से नहीं बना है तो कुछ कहते हैं कि सड़क श्रापित है, तभी तो साल दर साल इस हिस्से में हादसों की तादाद बढ़ रही है.

बुजुर्ग रत्न लाल और राजमती देवी भी अपनी आंखों के सामने पले-बढ़े नौजवानों की मौत को याद कर चिंतित हैं. किन्तु इन हादसों का गांव के नाम से क्या रिश्ता है, इस पर कोई कुछ कहने को तैयार नहीं. हालांकि कई बार गांव का नाम बदलने की भी बात हुई पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया. ग्रामीणों ने अपने स्तर से ही गांव का नाम मरगांव से बदल कर महरगांव करने का प्रस्ताव दिया है किन्तु फिर भी अभी तक सरकारी रिकॉर्ड मे गांव का नाम मरगांव ही दर्ज है.

गांव का नाम मरगांव क्यू पड़ा इसे लेकर कोई ठोस जानकारी तो नहीं लेकिन गांव के बुजुर्ग एक किस्सा सुनाते हैं. उनके अनुसार कुमाऊं से कोई व्यक्ति यहां घर जवाईं बनकर रहा था और इस इलाके में गाय-भैंस चराने का काम करता था जिस कारण इसे मौर गांव कहा गया, जो बाद में मरगांव हो गया.