भारत की पहली महिला फोटो जर्नलिस्ट के 104वें जन्मदिन पर गूगल ने ऐसे किया याद

भारत की पहली महिला फोटो जर्नलिस्ट होमई व्यारवाला के 104वें जन्मदिन पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें याद किया. इस साल गूगल डूडल की लिस्ट में बेगम अख्तर, कॉर्नेलिया सोराबजी और अनसूया साराभाई का नाम भी शामिल है.
फोटो आर्कइव में होमई डालडा 13 के नाम से मशहूर है. इस कोड नेम डालडा 13 दरअसल उनकी कार की नंबर प्लेट DLD 13 से पड़ा. उन्होंने 15 अगस्त 1947 में लाल किले पर ध्वजारोहण समारोह की तस्वीरें खींची थी.

पद्म विभूषण से सम्मानित होमई का जन्म गुजरात की पारसी फैमिली में हुआ था. पिता की घूमंतू थियेटर कंपनी होने के कारण उनका ज्यायातर बचपन घूमते हुए बीता. होमई ने मुबंई के जेजे स्कूल ऑफ़ आर्ट से फ़ोटोग्राफ़ी की शिक्षा लेने के बाद उन्होंने किशोरावस्था से ही कैमरे से दुनिया को देखना शुरू कर दिया था.हालांकि उनका करियर टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ शुरू हुआ था.

करियर की शुरूआत के समय फोटो क्रेडिट में उनके पति मॉनेकशॉ व्यारवाला या फिर उनके कोड नेम से जाता था. होमई की असली पहचान 1942 में दिल्ली में ब्रिटिश सूचना सेवा में काम करने के दौरान बनी. जब उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाओं की तस्वीर खींची थी. वह 1930 से 1970 के बीच एक मात्र प्रोफेशनल फोटो पत्रकार थी. उन्होंने लार्ड माउंटबेटन की विदाई, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के दाह संस्कार की तस्वीरें भी खींची थी.

इसके अलावा उन्होंने तिब्बत से बच कर आए दलाई लामा और क्वीन एलिजाबेथ की तस्वीर खींचने वाली पहली फोटोग्राफर थी.1970 में अपने पति की मौत के बाद होमई ने अपने करियर को छोड़ दिया था. होमई ने अपनी फोटोग्राफ के कलेक्शन को दिल्ली की अल्काजी फाउंडेशन फॉर आर्ट्स को सौंप दिया था. साल 2012 में 15 जनवरी वडोदरा स्थित अपने घर में उनका देहांत हो गया.

 

होमई व व्यारवाला लार्ड माउंटबेटन की विदाई, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के दाह संस्कार की तस्वीरें भी खींची थी. उन्होंने संक्रमण काल में देश की सामाजिक और राजनीतिक जीवन को कैमरे में कैद किया.उन्हें जनवरी 2011 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था.