देहरादून : 409 नौजवान बने भारतीय सेना का हिस्सा

देहरादून, भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) के इस गीत “भारत माता तेरी कसम, तेरे रक्षक बनेंगे हम” पर कदमताल करते जेंटलमैन कैडेट ड्रिल स्क्वायर पर पहुंचे, तो लगा कि विशाल सागर उमड़ आया है. एक साथ उठते कदम और गर्व से तने सीने दर्शक दीर्घा में बैठे हरेक शख्स के भीतर ऊर्जा का संचार कर रहे थे. इसके साथ ही भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) में अंतिम पग भरते ही 409 नौजवान भारतीय सेना का हिस्सा बन गए. इसके साथ ही 78 विदेशी कैडेट भी पास आउट हुए.

बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल अबू बिलाल मोहम्मद शाह फिउल हक ने परेड की सलामी ली. सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर मार्कर्स कॉल के साथ परेड का आगाज हुआ. इसके बाद विभिन्न कंपनियों के सार्जेंट मेजर ने ड्रिल स्क्वायर पर अपनी-अपनी जगह ली. 8.55 पर एडवांस कॉल के साथ ही छाती ताने देश के भावी कर्णधार असीम हिम्मत और हौसले के साथ कदम बढ़ाते परेड के लिए पहुंचे. इसके बाद परेड कमांडर चंद्रकांत आचार्य ने ड्रिल स्क्वायर पर जगह ली.
कैडेट्स ने शानदार मार्चपास्ट से दर्शक दीर्घा में बैठे हर शख्स को मंत्रमुग्ध कर दिया.

इधर, युवा सैन्य अधिकारी अंतिमपग भर रहे थे, तो आसमान से हेलीकाप्टरों के जरिये उन पर पुष्प वर्षा हो रही थी.इस मौके पर बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल अबू बिलाल मोहम्मद शाह फिउल हक ने कहा कि भारत व बांग्लादेश के बीच वर्षों से दोस्ताना संबंध रहे हैं. हमारी सिर्फ सीमाएं ही नहीं मिलती, बल्कि भारत बांग्लादेश में भौगोलिक, सामाजिक व सांस्कृतिक समानताएं भी हैं. उन्होंने कहा कि आइएमए परेड में बतौर रिव्यूइंग अफसर पहुंचकर गौरव की अनुभूति हुई है. यह क्षण भारत बांग्लादेश के बीच संबंधों को और आगे ले जाएगा.

खासकर दोनों सेनाओं के बीच रिश्तों की नींव और मजबूत हुई है. उन्होंने 1971 के युद्ध को याद करते कहा कि भारतीय सेना ने मुक्ति संग्राम में कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग दिया.इन्हें मिला पदक चंद्रकांत आचार्य को प्रतिष्ठित स्वार्ड आफ आनर व स्वर्ण पदक, अमरप्रीत सिंह को रजत पदक, सौरभ दास को कांस्य पदक प्रदान किया गया. रनावत यादागिरी ने सिल्वर मेडल (टीजी) ने हासिल किया. तजाकिस्तान के एलेक्जांडर सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट चुने गए. चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बैनर नौशेरा कंपनी को मिला.