उत्तराखंड के भवनों में भूकंपरोधी तकनीको का ,क्यों नहीं हो रहा है इस्तेमाल?

देहरादून, भूकंप की दृष्टि से उत्तराखंड खतरनाक जोन में है, लेकिन यहां बनने वाले भवनों में भूकंप निरोधी तकनीक का इस्तेमाल नहीं हो रहा है. हालांकि इस संबंध में शासन स्तर पर यह निर्णय लिया गया था कि राज्य में जो सरकारी भवन बनेंगे, उनमें तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन सरकारी भवनों में ही इस तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. आम लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई, जिससे राज्य में जो भी भवन बन रहे हैं वह पुरानी तकनीक के आधार पर ही बन रहे हैं.

गौरतलब है कि कल रात भूकंप के झटके लगे तो दहशत का माहौल पैदा हो गया. लोग घरों से बाहर निकल आए. वैसे भी उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से खतरनाक जोन की श्रेणी में आता है. यहां भूकंप कभी भी तबाही मचा सकता है. शासन ने पूर्व में यह निर्णय लिया था कि जितने भी सरकारी भवनों का निर्माण होगा, उनमें भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके अलावा निजी लोग भी यदि भवनों का निर्माण कराते हैं तो उन्हें भी भूकंपरोधी तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी, ताकि भूकंप आने की स्थिति में जान माल की क्षति न हो.

यही नहीं यह भी प्रस्ताव था कि जो भवन पुराने निर्मित हैं, उनमें भी भूकंपरोधी तकनीक का समावेश किया जाए. सरकार की इस मंशा पर सरकारी नुमाइंदों ने ही पानी फेर दिया है. ऊधमसिंह नगर जिले में ही अनेक सरकारी भवन निर्माणाधीन हैं, लेकिन कहीं भी भूकंपनिरोधी तकनीक का इस्तेमाल नहीं हो रहा है. भवन अपने पुराने तरीके से ही बनाए जा रहे हैं. आम लोगों को भी भूकंपरोधी तकनीक के बारे में जागरूक नहीं किया जा रहा है.