दिल्ली सरकार प्रदूषण पर एक्शन प्लान देने में नाकाम, NGT ने लगाई फटकार

नई दिल्ली, दिल्ली-एनसीआर में फैले प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में चल रही बहस के दौरान ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार को फिर फटकार लगाई है.सुनवाई के दौरान एनजीटी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली-एनसीआर में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, बच्चों की हालत खराब है.बावजूद इसके दिल्ली सरकार ने अब तक एक्शन प्लान पेश नहीं किया है.

एनजीटी ने सख्त हिदायत देते हुए दिल्ली सरकार को निर्देशित किया कि वह अगले 48 घंटों के दौरान प्रदूषण से निपटने का एक्शन प्लान प्रस्तुत करें.इसी के साथ हरियाणा और उत्तर प्रदेश को भी इसी तरह का एक्शन प्लान देने को कहा है।
बता दें कि पिछले कुछ दिनों से नोएडा समेत दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है.इसकी वजह से अस्थमा व क्रोनिक पल्मोनरी डिजीज के मरीजों को सर्वाधिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा.वायुमंडल में ऑक्सीजन की कमी होने से सांस फूलने की समस्या सामने आ रही है.

नए लोगों में यह समस्या कम है, लेकिन जो पहले से दमा, अस्थमा जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं, उनका दिमाग खोखला होने लगा है.फोर्टिस, कैलाश व जेपी जैसे अस्पतालों में इस तरह के कई मरीज पिछले कई दिनों के दौरान सामने आ रहे हैं, जिन्होंने याददाश्त कमजोर होने, निर्णय नहीं ले पाने, किसी चीज को लेकर कन्फ्यूजन होने, तनाव होने, सोचने की क्षमता कम होने, काम में मन न लगने, उलझन होने जैसी शिकायत की है.

वरिष्ठ न्यूरो सर्जनों के अनुसार इन दिनों वायुमंडल में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से ऑक्सीजन बेहद कम हो गई है.इस लिए रक्त में भी ऑक्सीजन कम होने लगी है, जिसके कारण ब्रेन में ऑक्सीजन की पर्याप्त सप्लाई नहीं हो पा रही.इसीलिए मरीज को उलझन, याददाश्त कमजोर होने जैसी दिक्कतें पैदा हो रही हैं.ऑक्सीजन की मात्रा ज्यादा कम होने पर ब्रेन स्ट्रोक का भी खतरा बन रहा है.रविवार को भी शहर का पीएम-10 स्तर 500 के पार रिकॉर्ड किया गया है.लगातार प्रदूषण के संपर्क में रहने के कारण यह मानव शरीर पर व्यापक असर डाल रहा है.त्वचा रोग, खांसी-जुकाम के अतिरिक्त अब शरीर का तंत्रिका तंत्र भी प्रभावित हो रहा है.