फेसबुक के जरिए अपने मालिक के घर सुरक्षित पहुंची भैंसें

बेंगलुरू, दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया साइट फेसबुक सिर्फ मित्रों, परिवार और परिचितों को ही नही बल्कि जानवरों के साथ भी संपर्क रखती हैं.ऐसा ही कुछ बेंगलुरू में एक भैंस मालिक के साथ हुआ. दरअसल, एक शख्स की भैंसें खो गईं तो उन्हें फेसबुक के जरिए तलाश लिया गया.

बेंगलुरु के होसकोटे के इस्तुरु गांव में सोमवार शाम खो गईं भैंसें फेसबुक के जरिए अपने मालिक के घर में वापस सुरक्षित पहुंच गईं. यह भैंसें चरते हुए गांव से तकरीबन 10 किलोमीटर दूर निकल गईं थीं. भैंसों के मालिक नारायण स्वामी ने उन्हें गांव और खेतों में भी तलाशा लेकिन वे नहीं मिलीं. भैंसें चरते हुए कोद्रहल्ली गांव पहुंच गईं. कोद्रहल्ली, इस्तुरु गांव से तकरीबन 10 किलोमीटर दूर है.

जब मोहन नाम के शख्स ने भैंसों को देखा तो वो उन्हें अपने घर ले आया है और उनकी देखभाल की. उसने मालिक को ढूंढने के लिए भैंसों की तस्वीर फेसबुक पर डाल दी. मोहन ने फेसबुक पर तस्वीर के साथ लिखा, ‘ये भैंसें किसकी हैं? इसे तब तक शेयर करें जब तक कि तस्वीर मालिक तक न पहुंच जाएं.’

नागेश नाम के शख्स ने फेसबुक पर ये तस्वीरें देखीं और इसे नारायण स्वामी को दिखाया. तब जाकर नारायण अपनी भैंसें वापस ला पाया. दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया साइट फेसबुक सिर्फ मित्रों, परिवार और परिचितों को ही नही बल्कि जानवरों के साथ भी संपर्क रखती हैं.ऐसा ही कुछ बेंगलुरू में एक भैंस मालिक के साथ हुआ.

दरअसल, एक शख्स की भैंसें खो गईं तो उन्हें फेसबुक के जरिए तलाश लिया गया.बेंगलुरु के होसकोटे के इस्तुरु गांव में सोमवार शाम खो गईं भैंसें फेसबुक के जरिए अपने मालिक के घर में वापस सुरक्षित पहुंच गईं. यह भैंसें चरते हुए गांव से तकरीबन 10 किलोमीटर दूर निकल गईं थीं. भैंसों के मालिक नारायण स्वामी ने उन्हें गांव और खेतों में भी तलाशा लेकिन वे नहीं मिलीं. भैंसें चरते हुए कोद्रहल्ली गांव पहुंच गईं. कोद्रहल्ली, इस्तुरु गांव से तकरीबन 10 किलोमीटर दूर है.

जब मोहन नाम के शख्स ने भैंसों को देखा तो वो उन्हें अपने घर ले आया है और उनकी देखभाल की. उसने मालिक को ढूंढने के लिए भैंसों की तस्वीर फेसबुक पर डाल दी. मोहन ने फेसबुक पर तस्वीर के साथ लिखा, ‘ये भैंसें किसकी हैं? इसे तब तक शेयर करें जब तक कि तस्वीर मालिक तक न पहुंच जाएं.’ नागेश नाम के शख्स ने फेसबुक पर ये तस्वीरें देखीं और इसे नारायण स्वामी को दिखाया. तब जाकर नारायण अपनी भैंसें वापस ला पाया.