एनएच-74 घोटाला: एसडीएम की जांच रिपोर्ट एसआईटी को भेजी

जिलाधिकारी डा. नीरज खैरवाल ने राष्ट्रीय राजमार्ग 74 के अंतर्गत ग्राम बरा में खसरा संख्या 250 एवं 262 के प्रकरणों की जांच एसडीएम किच्छा से कराई. एसडीएम की जांच रिपोर्ट में घपला पाए जाने पर एसआईटी से जांच की आवश्यकता बताई गई. जिलाधिकारी खैरवाल ने बताया कि एसडीएम की जांच रिपोर्ट को एनएच घोटाले की जांच कर रही एसआईटी को भेजा है, ताकि जांच रिपोर्ट के बिन्दुओं को एसआईटी जांच में शामिल किया जा सके एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने एसडीएम की जांच रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की है. कहा कि वह इस जांच रिपोर्ट को एसआईटी जांच में शामिल करा रहे हैं.

डीएम के निर्देश पर की गई जांच रिपोर्ट में एसडीएम ने कहा है कि ग्राम बरा में राष्ट्रीय राजमार्ग 74 के फोरलेन सड़क बनाने का कार्य एनएचएआई ने किया है. उक्त मार्ग में पडने वाले खसरा नंबर 398 एवं 617 बंदोबस्ती जिल्द (1958 59) अभिलेखों में खंती के रूप में दर्ज किया गया है. उक्त खसरा नंबरों का कुल रकवा 3.7130 हेक्येटर है, जिसमें से उक्त खंती वाली भूमि का कुल क्षेत्रफल 1.5389 हेक्टेयर राजकीय भूमि के रूप में है तथा शेष खंती का क्षेत्रफल 2.1750 हेक्टेयर निजी व्यक्तियों की शामिल जोत दर्शाया गया है, जो संभवतया अभिलेखों में गलती से बंदोबस्ती कार्यवाही के दौरान दर्ज हो गया है. चूंकि यह सड़क से लगी हुई खंती की भूमि थी, जिस पर नियमानुसार उप्रजवि अधिनियम 1950 की धारा 132 के तहत भौमिक अधिकार नहीं दिए जा सकते हैं.

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्राम में राज्य सरकार द्वारा वर्ष 1991 92 में उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम 1953 के तहत पुनरू रिकार्ड आपरेशन (अभिलेखों का निर्माण) की कार्यवाही कराई गई. चकबंदी की प्रक्रिया के दौरान उक्त भूमि को चकबंदी की कार्यवाही से बाहर रखा गया, जिससे यह भूमि पूर्ववत निजी व्यक्तियों एवं लोकनिर्माण विभाग के संयुक्त स्वामित्व में दर्ज चली आ रही है, जबकि चकबंदी अधिनियम की धारा 29 क.क, 29 ख एवं 29 ग के तहत खंती वाली भूमि को सार्वजनिक प्रयोजन की भूमि मानते हुए इसे राज्य सरकार के पक्ष में दर्ज किया जाना चाहिए था, जो चकबंदी अधिकारियों द्वारा स्पष्ट लापरवाही से अथवा जानबूझ कर छोड़ा जाना प्रदर्शित होता है. जिसके लिए उत्तदायी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की जानी उचित है. वर्तमान में उक्त त्रुटि को ठीक करने हेतु चकबंदी अधिनियम की धारा 48 के तहत पुनरीक्षण की कार्यवाही एनएचएआई द्वारा की जानी उचित होगी.

एसडीएम ने जांच रिपोर्ट में कहा है कि ग्राम बरा में राष्ट्रीय राजमार्ग फोरलेन के निर्माण के लिए एनएचएआई द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा थ्री ए के तहत प्रारंभिक अधिसूचना का प्रस्ताव तैयार कर सक्षम अधिकारी काला के हस्ताक्षर के बाद पांच 2013 को प्रकाशन कराया गया तो खसरा नंबर 250 एवं 262 का प्रकाशन नहीं कराया गया, जबकि नियमानुसार थ्री ए के प्रकाशन में सभी प्रकार की की भूमि वह चाहे निजी हो अथवा राजकीय भूमि उन नंबरों का प्रकाशन अवश्य होना चाहिए था. ग्राम बरा में उक्त खसरा नंबरों का प्रकाशन जानबूझ कर छोड़ा गया है. यह जांच का विषय हो सकता है. इसलिए इसे वर्तमान में एनएच 74 के भूमि अधिग्रहण में हुए घपलों की जांच करने वाली एसआईटी को संदर्भित किया जाना उचित होगा, ताकि इसके पीछे के कारणों का पता लगा जा सके.

जांच रिपोर्ट के अनुसार ग्राम बरा में भूमि अधिग्रहण में खसरा संख्याओं का प्रकाशन थ्री ए में न होने से इस खंती वाली भूमि के खातेदारों द्वारा इस भूमि में फोरलेन सड़क बन जाने के बाद भी अधिग्रहण की प्रक्रिया की कमी का लाभ उठाते हुए इस भूमि को धारा 143 के तहत गैरकृषि कराया गया है तथा इसके बाद इसे अन्य व्यक्तियों को विक्रय किया गया है. इस संबंध में उल्लेखनीय तथ्य यह है कि उक्त खसरा नंबरों पर सड़क का निर्माण वर्ष 2013 से प्रारंभ होकर वर्ष 2015 तक पूर्ण हो गया था. उसके बाद भी उस सड़क वाली भूमि की रजिस्ट्री कराई गई जो एक जांच का विषय है. जिसकी जांच एसआईटी से कराकर विधिक कार्यवाही की जा सकती है.

जांच रिपोर्ट में इस तथ्य का जिक्र किया गया है कि खसरा संख्या 250 एवं 262 की भूमि सड़क बन जाने के बाद भी क्रेताओं द्वारा उक्त सड़क वाली भूमि को बेचने के बाद दाखिल खारिज की प्रक्रिया की गई जो त्रुटिपूर्ण है, जिसकी जांच की जानी जरूरी है. उक्त भूमि पर हुए दाखिल खारिज के प्रकरणों को निरस्त कराने के लिए एनएचएआई द्वारा कार्यवाही की जानी है. जिलाधिकारी डा. खैरवाल ने बताया कि एसडीएम की जांच रिपोर्ट को एसआईटी को जांच में शामिल करने को भेजा गया है