पिथौरागढ़ : लिपुलेख दर्रे के जरिए कैलाश-मानसरोवर तीर्थयात्रा पर अगले साल ज्यादा होगा खर्च!

डोकलम गतिरोध के चलते श्रद्धालुओं के उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के जरिये कैलाश-मानसरोवर तीर्थयात्रा पर जाने को तरजीह देने के बाद यात्रा की नोडल एजेंसी कुमांऊ मंडल विकास निगम (केएमवीएन) ने केंद्र को तीर्थयात्रा शुल्क बढ़ाए जाने का प्रस्ताव दिया है.

केएमवीएन के महाप्रबंधक (पर्यटन) टीएस मर्तोलिया ने बताया, ‘हमने इस संबंध में सोमवार को विदेश मंत्रालय को अपना प्रस्ताव भेजा है. इसमें प्रति श्रद्धालु तीर्थयात्रा शुल्क को 48000 रुपये करने का प्रस्ताव है, क्योंकि बस यात्रा, भोजन का खर्चा और मजदूरों द्वारा ढुलाई सभी मंहगी हो गई है. वर्तमान में प्रति श्रद्धालु 35000 रुपये तीर्थयात्रा शुल्क लिया जाता है.’

भारत और चीन के बीच डोकलम विवाद के मद्देनजर सिक्किम में नाथुला दर्रे के जरिए होने वाली मानसरोवर यात्रा बंद होने के बाद पिछले साल लिपुलेख दर्रे से जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई.

उन्होंने कहा, ‘श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के दबाव से निपटने के लिए भी शुल्क में वृद्धि की मांग की गई है, क्योंकि श्रद्धालुओं की संतोषजनक यात्रा हमारा उद्देश्य है.’ उन्होंने कहा कि लिपुलेख के जरिए यात्रा के बढ़ते दबाव के मद्देनजर कुछ सुधार और बदलाव भी करने होंगे.

महाप्रबंधक ने कहा, ‘पिछले साल हुए डोकलम घटनाक्रम के बाद लिपुलेख से जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अचानक 400 की बढ़ोत्तरी हो गई, जिससे केवल काठगोदाम से तवाघाट की यात्रा का खर्च 20 लाख रुपये से उपर चला गया और निगम को नुकसान हो गया.’

उन्होंने कहा कि हमें श्रद्धालुओं के भोजन तथा अन्य सुविधाओं पर भी ज्यादा खर्चा करना होगा क्योंकि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें मोटर मार्गों तथा पैदल मार्गों पर किसी प्रकार का कष्ट न उठाना पड़े.

हालांकि, प्रति श्रद्धालु तीर्थयात्रा शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी देना विदेश मंत्रालय पर है, जो 1981 में कैलाश-मानसरोवर यात्रा के दोबारा शुरू होने के बाद से इसे प्रतिवर्ष आयोजित कर रहा है.