POK में दक्षिण कोरियाई कंपनी ने निवेश करने से किया इनकार

सियोल|…. पाक अधिकृत कश्मीर में दूसरे देशों की मदद से पनबिजली परियोजना लगाने की पाकिस्तान सरकार की कोशिशों को करारा धक्का लगा है. इस परियोजना में रुचि दिखा रही दक्षिण कोरियाई कंपनियों को यहां की सरकार ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि वहां निवेश काफी जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि इससे भारत की संवेदनशीलता जुड़ी हुई है. सरकार के इस रुख को देखते हुए इन कंपनियों के रुख में बदलाव आने के संकेत है. पाकिस्तान लगातार यह कोशिश कर रहा है कि अधिकृत कश्मीर (पीओके) में विदेशी कंपनियो को निवेश के लिए तैयार किया जा सके ताकि उसके कब्जे पर एक तरह से अंतरराष्ट्रीय मुहर लगे.

हालांकि अभी तक चीन के अलावा किसी भी दूसरे देश की कंपनी ने यहां निवेश नहीं किया है. पीओके से गुजरने वाली चीन की महत्वाकांक्षी वन बेल्ट-वन रोड परियोजना का भारत कड़ा विरोध करता है. अब अमेरिका, फ्रांस समेत कई देश भारत के इस रुख के समर्थन में है. भारत से यहां आये पत्रकारों के एक समूह को संबोधित करते हुए दक्षिण कोरिया के उप विदेश मंत्री चो हुन ने कहा कि ‘कश्मीर के जिस हिस्से में पाकिस्तान पनबिजली परियोजना लगा रहा है उसे हम काफी संवेदनशील मानते हैं. यही वजह है कि हमने उस परियोजना में रुचि दिखाने वाली कंपनियों को बेहद कड़े शब्दों में बताया है कि वहां निवेश करने से बचें. हालांकि हम एक लोकत्रांतिक देश हैं और कारपोरेट सेक्टर कहां निवेश करता है यह निर्णय नहीं कर सकते.’

जानकारों की मानें तो भारत और दक्षिण कोरिया के लगातार प्रगाढ़ होते रिश्ते को देखते हुए इस बात की गुंजाइश कम ही है कि अब यहां की कंपनियां पाकिस्तान के भुलावे में आएंगी. दरअसल, दक्षिण कोरिया ने भारत के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को काफी अहमियत देनी शुरु कर दी है और वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता जिससे दोनो देशों के रिश्तों में किसी भी प्रकार का तनाव दिखे. भारत को सियोल में कितनी अहमियत दी जा रही है इसे इस बात से समझा जा सकता है कि यहां की सरकार ने भारत को दुनिया में कूटनीतिक लिहाज से पांचवा सबसे अहम साझेदार देश करार दिया है. हुन ने बताया कि, ‘अभी तक दक्षिण कोरिया के लिए रुस, चीन, अमेरिका और जापान ऐसे देश थे जो कूटनीतिक लिहाज से सबसे अहम माने जाते थे.

लेकिन अब इसमें भारत भी शामिल हो गया है. पीएम नरेंद्र मोदी की वर्ष 2015 की यात्रा के बाद दोनो देशों के बीच विशेष रणनीतिक रिश्ता कायम हुआ है. दोनों देशों के बीच रणनीति से जुड़े कई क्षेत्रों में करीबी रिश्ते बनाने के लिए लगातार उच्चस्तरीय बातचीत हो रही है.’ दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय में इस बात को लेकर भी काफी नाराजगी है कि पाकिस्तान ने उत्तर कोरिया को आण्विक हथियार विकसित करने में मदद की है जिसकी वजह से सिर्फ इस इलाके में ही नहीं बल्कि पूरे इलाके के लिए खतरा पैदा हो गया है. भारत भी लगातार उत्तर कोरिया की तरफ से घातक हथियार विकसित करने को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है. भारत यह मांग भी करता है कि उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार दिलाने में किस देश ने मदद की है उसकी भी जांच होनी चाहिए.