‘नैनीताल झील को बचाने के लिए अब नागरिकों को आगे आना होगा’

पिछले कुछ समय से सूख रही सरोवर नगरी की पहचान नैनी झील के संरक्षण में नैनीताल के नागरिकों की भूमिका को सर्वाधिक महत्वपूर्ण बताते हुए उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल ने सोमवार को कहा कि झील को बचाने के लिए ‘डिस्कशन मोड से एक्शन मोड’ में आना होगा.

देहरादून राजभवन में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ‘यूएनडीपी’ द्वारा ‘नैनी झील के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक व तकनीकी उपाय’ विषय पर आयोजित कार्यशाला को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि नैनी झील के संरक्षण के लिए समय-समय पर हुए सेमीनार में विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए तथा विभिन्न संस्थाओं एवं समितियों द्वारा भी व्यापक अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार की गई हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि इन सुझावों का ठोस क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए.

पाल ने कहा कि इस संबंध में सर्वाधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नैनाताल के नागरिकों को उठानी होगी और समुचित जल प्रबंधन को अपनाना होगा. राज्यपाल ने दिल्ली के पास स्थित ढांसा, बड़कल व सुरजकुंड आदि झीलों का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी ये सभी महत्वपूर्ण झीलें होती थीं, परंतु अब वे सूख चुकी हैं.

उन्होंने कहा, ‘ये हम सभी की जिम्मेदारी है कि नैनी की हालत इन झीलों जैसी न हो. इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति से काम करना होगा. सामान्य बुद्धिमत्ता का प्रयोग करते हुए सामान्य नागरिक भी नैनी झील के संरक्षण में अपनी भूमिका निभा सकता है.’ राज्यपाल ने कहा कि नैनीताल पीने के पानी की आपूर्ति के लिए नैनी झील पर निर्भर है, जबकि प्रतिवर्ष शहर की आबादी से कई गुना अधिक पर्यटक भी वहां आते हैं, जिनके लिए भी पानी की व्यवस्था करनी होती है. उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें समुचित जल प्रबंधन एवं पर्यटन को अपनाना होगा.

इस संबंध में पाल ने पीने के पानी के दुरुपयोग को रोकने, वर्षाजल के संग्रहण को प्रोत्साहित करने तथा नैनीताल के लिए पानी के वैकल्पिक स्रोत को विकसित करने के साथ ही यह संभावना भी तलाशे जाने को कहा कि क्या नैनीताल आने वाले पर्यटकों के एक भाग को निकटवर्ती दूसरे पर्यटन स्थल जाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा ​नैनी झील सहित राज्य में जलस्रोतों के संरक्षण के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करने तथा हाईकोर्ट द्वारा इस संबंध में दिशा निर्देश जारी करने का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने स्थानीय प्रशासन को भी इस पर गंभीरता से काम करने को कहा.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि पूरे राज्य में जलस्रोतों व नदियों के पानी में कमी आई है, जिसके लिए सभी चिंतित हैं.

नैनी झील के संरक्षण के लिए रणनीति बनाते हुए समयबद्ध तरीके से काम करने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने नैनी झील के साथ ही पूरे राज्य में जल संरक्षण के लिए दृढ़ संकल्प के साथ काम शुरू किया है.

राज्य सरकार द्वारा 25 मई को शुरू किए गए ‘जल संचय-जीवन संचय’ अभियान का जिक्र करते हुए रावत ने कहा कि बिंदाल व रिस्पना के पुनर्जीवीकरण के लिए अभियान प्रारम्भ किया गया है, जहां व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण व सफाई का काम एक ही दिन में किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि यूएनडीपी की कार्यशाला में आने वाले सुझावों को राज्य सरकार कार्यरूप में परिणित करेगी.