नैनीताल : जंगल में मिला 6 महीने से लापता बुजुर्ग का कंकाल, आधार से हुई पहचान

नैनीताल के पुराना राजभवन (स्नोव्यू) क्षेत्र से इसी साल 28 मई से लापता 70 वर्षीय बुजुर्ग का कंकाल रविवार को घने जंगल में मिला. कंकाल के पास पड़ी जैकेट से मिले आधार कार्ड, फोटो के आधार पर पुत्र ने उनकी शिनाख्त की. इसके बाद पुलिस ने कंकाल को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पुलिस के मुताबिक सोमवार को पोस्टमार्टम होगा.

रविवार दोपहर करीब एक बजे पुराना राजभवन क्षेत्र निवासी प्रकाश समेत अन्य क्षेत्रवासी सेंटलू वन बीट के कंपार्ट नंबर 6 में लकड़ी बीनने गए हुए थे. इसी दौरान उन्हें एक पेड़ के नीचे झाड़ियों में एक जैकेट, थोड़ी ही दूर पर एक पैंट व जूते पड़े दिखाई दिए. ये लोग जब जैकेट के पास गए तो वहां पर उन्हें मानव कंकाल दिखाई दिया.

उसके बाद वह लकड़ी बीनना छोड़कर घर लौट आए और मामले की जानकारी पड़ोसियों को दी. बीती 28 मई को लापता हुए 70 वर्षीय बुजुर्ग के पुत्र मनीष दानू व क्षेत्र के कई अन्य युवक मौके पर पहुंच गए. कपड़ों के आधार पर मनीष ने कंकाल उनके पिता पदम सिंह दानू का होने की आशंका जताई. क्षेत्रवासियों ने मामले की जानकारी पुलिस व मीडिया कर्मियों को दी.

सूचना मिलते ही एएसपी हरीश चंद्र सती, मल्लीताल कोतवाली के एसएसआई भुवन चंद्र मासीवाल आदि मौके पर पहुंचे. पुलिस के पहुंचने के बाद कंकाल से लिपटी जैकेट की तलाशी ली गई, जिसमें से पद्म सिंह दानू की फोटो व आधार कार्ड व एक टार्च बरामद हुई. इसके आधार पर कंकाल पदम सिंह दानू का होने की पुष्टि हुई. पुलिस ने कंकाल को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया.

जिस पेड़ के नीचे झाड़ियों में कंकाल मिला उसी पेड़ की एक डाली में फंदा बनी हुई रस्सी भी लटकी हुई थी. इसके आधार पर वृद्ध द्वारा आत्महत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त करने के कयास लगाए जा रहे हैं. वृद्ध के पड़ोसियों व परिजनों के मुताबिक वह बीते कुछ वर्षों से मानसिक रूप से अस्वस्थ चल रहे थे. शायद इसी परेशानी की वजह से उन्होंने अपनी जान दी होगी.

सेंटलू के जंगल में जिस जगह से कंकाल बरामद हुआ है वह पुराना राजभवन क्षेत्र से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर घने जंगल में था. पुलिस व मीडिया कर्मियों को यहां तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. रास्ता इतना दुर्गम था कि लोगों को झाड़ियां पकड़ कर चलना पड़ा.

कंकाल मिलने के बाद पुलिस व क्षेत्रीय लोगों को अस्थियों को समेटने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी. जंगल में काफी दूर तक हड्डियां फैली हुई थीं. ढूंढखोज के बाद छाती का हिस्सा व पैरों की हड्डियां ही बरामद हुईं. कयास लगाए जा रहे थे कि घना जंगल होने के चलते जंगली जानवरों द्वारा शव के विभिन्न अंगों को नोचकर काफी दूर तक ले जाया गया होगा.

कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद भी कंकाल के सिर का हिस्सा समेत कई अन्य हिस्से बरामद नहीं हो पाए. हड्डियां समेटने व कंकाल को जंगल से लाने में शिव सिंह राठौर, पूरन सिंह चिलवाल, नवीन कुमार, नीरज कुमार, मनोज जोशी, जय कुमार, जगत सिंह आदि क्षेत्रीय युवकों ने पुलिस की मदद की.