एनएच 74 घोटाले का मुख्य आरोपी डीपी सिंह कोर्ट में पेश, एसआईटी ने मांगा रिमांड

डी पी सिंह को 15 दिनों की हिरासत में ले जाते हुए पुलिस कर्मी

एनएच 74 मुआवजा घोटाले में मुख्य आरोपी बनाए गए निलंबित पीसीएस अफसर डीपी सिंह को शुक्रवार को नैनीताल स्थित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा सकता है. एसआईटी ने अदालत से डीपी सिंह को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने की अर्जी लगाई है. उधर, एसआईटी ने काशीपुर तहसील के अहलमद संजय चौहान को गिरफ्तार किया.

गौरतलब है कि पूर्व विशेष भूमि अध्यप्ति अधिकारी डीपी सिंह ने कल एसएसपी दफ्तर में आत्मसमर्पण किया था. उन्हें रात भर सिडकुल चौकी की हवालात में रखा गया. सिडकुल चौकी में एसआईटी ने उनसे पूछताछ की. बताते हैं कि डीपी सिंह अपने पुराने बयान पर ही कायम रहे. शुक्रवार को उन्हें नैनीताल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा सकता है. एसआईटी ने अदालत से डीपी सिंह को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने की अर्जी लगाई है.
एसआईटी ने काशीपुर तहसील के अहलमद संजय चौहान को गिरफ्तार किया. उसे भी जेल भेजा गया है. संजय चौहान काफी समय से फरार चल रहा था.

यहां बता दें कि एक मार्च को तत्कालीन मंडलायुक्त डी सेंथिल पांडियन ने पत्रकारों से बात करके एनएच 74 के चौड़ीकरण में करोड़ों के घोटाला उजागर करते हुए अपनी जांच रिपोर्ट शासन को भेजी थी. रिपोर्ट में कहा गया था कि बैक डेट में जमीनों की 143 करके किसानों को कई गुना अधिक मुआवजा दिया गया है. इस घोटाले में पूरे सिंडीकेट का हाथ होना भी बताया था. उसके बाद 10 मार्च को शासन के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी प्रताप शाह की ओर से घोटाले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी.

उस वक्त दर्ज एफआईआर में एसएलएओ अथवा उनके स्टाफ का जिक्र नहीं था, जिसे शासन ने गंभीरता से लिया तो अनुपूरक रिपोर्ट दर्ज कराकर उसमें एसएलएओ व उनके स्टाफ का नाम एफआईआर में बढ़वाया गया. उसके बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार का गठन हुआ तो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने डीपी सिंह समेत छह पीसीएस अफसरों को निलंबित कर दिया था. उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने का आश्वासन दिया था.

सीबीआई को जांच के लिए पत्र भी लिखा गया, लेकिन इस बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई जांच कराने के निर्णय पर पुनर्विचार करने को कहा. हालांकि उस वक्त सरकार ने जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी थी. बाद में इसकी जांच एसआईटी ने ही शुरू कर दी थी. यहां बता दें कि पूर्व में एसआईटी पीसीएस अफसर भगत सिंह फोनिया समेत नौ कर्मचारियों एवं किसानों को गिरफ्तार करके जेल भेज चुकी है.