केंद्र में सिर्फ नरेंद्र मोदी ही सरकार हैं, बाकी सब सरोकार हैं: हरीश रावत

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि केंद्र में सिर्फ नरेंद्र मोदी ही सरकार हैं, बाकी सब सरोकार हैं. आरोप लगाया कि एक षडयंत्र के तहत ही संसद का शीतकालीन सत्र टाला गया है. कहा कि देश में नोटबंदी के बाद सबसे बड़ा रक्षा घोटाला हुआ है. उसी तर्ज पर प्रदेश सरकार शीत कालीन सत्र को छोटा किया जा रहा है, ताकि सरकार जवाबदेही से बच सके.

वह पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़ के आवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि संसद सत्र में जनता से जुड़े प्रमुख सवाल उठाए जाते तो मोदी की जवाबदेही बनती. कहा कि एक कारपोरेट घराना जो सरकार चला रहा है को फायदा पहुंचाने के लिए राफेल प्लेन खरीदने में इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा घोटाला हुआ है. यूपीए सरकार में जिस प्लेन का सौदा हुआ था, उससे चार गुना अधिक मूल्य पर प्लेन खरीदे गए हैं. यूपीए सरकार में प्लेन खरीदते वक्त टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होती थी, मगर वर्तमान सरकार ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर तक नहीं ली है.

कहा कि यदि संसद सत्र होता तो न खाऊंगा न खाने दूंगा का जुमला बोलने वालों की पोल खुल जाती कि यह जुमला अपने खास लोगों के लिए नहीं है. रावत ने आरोप लगाया कि अमित शाह के बेटे को 16 हजार प्रतिशत का लाभ हो जाता है. अजीत डोभाल के पुत्र पर गंभीर आरोप लगते हैं. गुजरात के मुख्यमंत्री पर भी गंभीर आरोप लगे. व्यापम घोटाले की जांच पर सवालिया निशान लग रहे हैं. नोटबंदी बड़ा घोटाला है, क्योंकि रिजर्ब बैंक ने सारे आंकलन झुठलाते हुए कह दिया है कि 99 फीसदी मुद्रा वापस आ गई. यानि काला धन देश में था ही नहीं. उन्होंने आरोप लगाया कि जीएसटी लागू करने में केंद्र सरकार विफल हो गई है. जीएसटी में छह बड़े संशोधन हो चुके हैं और आगे भी संशोधन होने के संकेत हैं. ऐसा लगता है कि जिनती बार राहुल गांधी गुजरात में दहाड़ेंगे, उतनी बार संशोधन होंगे. किसानों की आत्महत्या, गन्ना किसानों की खराब स्थिति का प्रश्न संसद उठता. महंगाई बढ़ी है. गैस सिलेंडर लांच होने के बाद से 2014 तक सिलेंडर के दाम 375 रुपये थे, लेकिन जबसे मोदी का प्रधानमंत्री के रूप में जन्म हुआ है तब से गैस के दामों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. आज 775 रुपये में गैस सिलेंडर मिल रहा है.

रावत ने कहा कि उत्तराखंड में भी शीत सत्र को छोटा करने की कोशिश की जा रही है, ताकि विपक्ष के सवालों से भागा जा सके. त्रिवेंद्र सरकार राज्य में खड़े होने वाले सवालों से बचना चाहती है. कहा कि त्रिवेंद्र सरकार बनने के बाद विकास कार्यों को अवकाश हो गया है. बोले बेहड़ ने जितने विकास कार्य बगैर विधायक रहते हुए कराए, उसके दस फीसदी विकास कार्य भी विधायक नहीं करा पा रहे हैं. लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, आरईएस, जल निगम आदि में बजट ही नहीं है. जलकल्याण की 11 योजनाएं बंद कर दी गई है. 25 योजनाओं को इतना जटिल कर दिया गया है कि लाभार्थी तक उसका लाभ न पहुंच पाए. साढ़े छह सौ करोड़ रुपये जो सीधा गरीब के खाते में जाता उसे सरकार बचा रही है.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री जीरो टारलेंस की बात करते हैं. एक मंत्री के परिवार के मुखिया पर गलत तरीके से जमीनों की खरीद फरोख्त का आरोप लगा, लेकिन सरकार जांच तक कराने को तैयार नहीं है. यह कैसा जीरो टारलेंस है. त्रिवेंद्र रावत बताएं कि क्या कार्रवाई की? आरोप लगाया कि और भी मंत्री संदेह के दायरे में हैं, जिन्होंने रिश्तेदारों को आगे करके माल कमाया है. कहा कि मुख्यमंत्री उनसे नाम पूछते हैं? वह समय आने पर नामों का खुलासा करेंगे. आज खेती और किसान उपेक्षित हैं. धान की खरीद योजना फेल है.