प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की पेंशन में 1200 प्रतिशत की बढ़ोतरी

सरकारी नौकरी में रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को जीवनभर पेंशन मिलती है. इस पेंशन में बढ़ोतरी वेतन आयोग द्वारा समय-समय पर की जाती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले के बाद प्राइवेट नौकरी करने वाले एक शख्स के पेंशन में 10 या 20 प्रतिशत की नहीं बल्कि 1200 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.

जी हां हरियाणा टूरिज्म कॉर्पोरेशन से रिटायर्ड हुए प्रवीण कोहली के पेंशन में 1200 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और उनकी सैलरी 2372 रुपए से बढ़कर 30592 रुपए हो गई. प्रवीण कोहली की पेंशन में यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2016 के एक आदेश के बाद आया,इस फैसले में कोर्ट ने ईपीएफओ को एंप्लॉयी पेंशन स्कीम (ईपीएस) के तहत 12 याचिकाकर्ताओं की पेंशन रिवाइज करने को कहा था.

दरअसल प्रवीण कोहली समेत कुछ और याचिकाकार्ताओं और निजी ईपीएफ फंड ट्रस्टी ने ईपीएफओ से संपर्क कर ईपीएस योगदान पर सीमा को हटाने की मांग की थी और इसे पूरे वेतन पर लागू करने को कहा.ईपीएफओ ने उनकी मांग को खारिज करते हुए 1996 के संशोधन का हवाला दिया, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने ईपीएफओ के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और ज्यादातर हाईकोर्ट ने ईपीएफओ के खिलाफ फैसला दिया.

इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. आखिरकार फैसला कर्मचारियों के हक में आया और कोर्ट ने ईपीएफओ को आदेश मानने कहा, लेकिन इस फैसले को लागू करने में एक साल का वक्त लग गया, लेकिन आखिरकार 1 नवंबर को ईपीएफओ ने कोर्ट के फैसले को लागू कर दिया.

बता दें कि पेंशन स्कीम के तहत ईपीएफ के पास 5 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं.पेंशन स्कीम के तहत प्राइवेट नौकरी करने वाले सभी कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत और महंगाई भत्ता ईपीएफ में जमा करवाते है. कंपनी रूल के मुताबिक उतनी ही रकम एंप्लॉयर भी ईपीएफओ में जमा करवाता है, लेकिन एंप्लॉयर के फंड से 8.33 प्रतिशत हिस्सा ईपीएस में चला जाता है, जो कि कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद ही मिलता है.