मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने IAS अधिकारियों से कहा- नई पीढ़ी की तरह सोचें

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) अधिकारियों से संचार क्रांति के इस युग में हर स्थति को लेकर तैयार (‘अपडेटेड और रिस्पांसिव’) रहने तथा समस्याओं का व्यवहारिक हल ढूंढ़ने के लिए लगातार जनसंवाद बनाए रखने को कहा. अस्थायी राजधानी देहरादून के निकट मसूरी स्थित प्रतिष्ठित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में मध्यावधि प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि संचार क्रांति के इस युग में उन्हें आधुनिक संचार तकनीक से लगातार अपडेट रहना होगा.

उन्होने कहा, ‘आज नई पीढ़ी अधिक होशियार है और उसे प्रतिक्रिया तेज चाहिए इसलिए जरूरी है कि आईएएस अफसर भी आधुनिक तकनीक के साथ ‘रिस्पांसिव व अपडेटेड’ हों. अब जनता व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर अपनी समस्याएं एवं शिकायतें भेजती है और तत्काल प्रतिउत्तर एवं समाधान की अपेक्षा भी करती है.’ जनता से सीधे संवाद का महत्व बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कई बार जनता से बहुत अच्छे सुझाव एवं समाधान प्राप्त होते हैं.

पिछली बीजेपी सरकार में कृषिमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए रावत ने बताया कि उन्होंने अपने अधिकारियों के साथ सात दिनों तक क्षेत्र भ्रमण किया था और मौके पर ही तीन शासनादेश जारी किए थे.

उन्होंने कहा, ‘जनता से वार्तालाप के दौरान समस्याओं का व्यवहारिक समाधान प्राप्त होता है.’ इस संबंध में रावत ने कहा कि वर्तमान सरकार जो नर्सरी एक्ट लाने जा रही है वह भी जनता से प्राप्त सीधे फीडबैक के आधार पर ही तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग में कोई न कोई गुण अवश्य होता है और उसे पहचानकर, सबको साथ लेकर आगे बढ़ना वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी है.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नियम कानूनों की जानकारी के साथ राजनैतिक नेतृत्व के समक्ष अपनी राय बेबाकी से रखने को भी कहा.

आठ-दस वर्ष का अनुभव प्राप्त कर चुके अधिकारियों के लिए आयोजित किए जा रहे इस मध्यावधि प्रशिक्षण कार्यक्रम के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अभी तक प्रारंभिक फेज में उप-जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, जिलाधिकारी के रूप में नीतियों, नियमों, निर्देशों का सिर्फ पालन कर रहे थे परन्तु अब उन्हें बड़ी जिम्मेदारियों के साथ नीतियों-नियमों के निर्धारण में भी अपनी भूमिका अदा करनी होगी.

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘अब आपको सिर्फ करना नहीं है, वरन क्या करना है, यह भी आपको निर्धारित करना है.’ एक माह के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 22 राज्यों के 85 अधिकारी भाग ले रहे हैं, जिनमें से अधिकांश वर्ष 2006 से 2008 बैच के हैं. इनमें उत्तराखंड कैडर के भी पांच अधिकारी बृजेश संत, राघव लंगर, राजेश कुमार, एस.एन.पाण्डे और विनोद रतूड़ी भी शामिल हैं.