तो इस दिन होगी राहुल गांधी की ताजपोशी

कांग्रेस पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने निर्णय ले लिया है. बैठक में निर्णय लिया गया कि अध्यक्ष पद के लिए 1 दिसंबर को अधिसूचना जारी होगी. 4 दिसंबर तक नामांकन किया जा सकेगा. 16 दिसंबर को वोटिंग होगी और 19 दिसंबर को अध्यक्ष की घोषणा की जाएगी.

कांग्रेस में राहुल के युग का औपचारिक आगाज भले ही उनके अध्यक्ष बनने के बाद से माना जाएगा मगर व्यावहारिक तौर पर पार्टी की कमान बीते कुछ साल से बतौर उपाध्यक्ष उनके हाथों में ही है. पार्टी के अंदर भी कभी उनके नेतृत्व को लेकर असहज महसूस कर अंदरनी तौर पर सवाल उठाने वाले कांग्रेस नेता भी अब उनका नेतृत्व स्वीकार कर चुके हैं.

सबको साथ लेकर चलने का इरादा
राहुल ने भी हाल के समय में अपनी युवा नेताओं की टीम के साथ वरिष्ठ नेताओं को भी पूरा तवज्जो देकर यह संदेश दिया है कि वह फिलहाल कांग्रेस में सबको साथ लेकर चलने का इरादा रखते हैं. सोनिया गांधी की सेहत ग़़डब़़ड होने के बाद से ही राहुल को पार्टी की कमान सौंपने की बातें चल रही हैं मगर कई मौकों पर इसको लेकर खुद राहुल तैयार नहीं दिखे. हालांकि बीते तीन महीनों के दौरान राहुल ने इस संशय से बाहर आकर नेतृत्व संभालने के अपने इरादे साफ कर दिए.

2004 में राजनीतिक पारी का आगाज
2004 में अमेठी से लोकसभा चुनाव जीतकर राजनीतिक पारी का आगाज करने वाले राहुल गांधी ने 2007 में बतौर कांग्रेस महासचिव संगठन में जिम्मेदारी संभाली. संप्रग की दस साल की सत्ता के दौरान उन्हें कई बार मनमोहन सिंह ने अपने कैबिनेट में शामिल करने का प्रस्ताव दिया, मगर राहुल ने इनकार कर दिया.

जब उठी थी राहुल को पीएम बनाने की बात
2012 में तो कांग्रेस के एक वर्ग ने उन्हें मनमोहन की जगह पीएम बनाने तक की अंदरूनी आवाज बुंलद की. जयपुर में जनवरी 2013 में राहुल को औपचारिक रूप से सोनिया गांधी का उत्तराधिकारी बनाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष के रूप में प्रमोशन दिया गया. राहुल के मुकाबले पार्टी के अंदर से उनके खिलाफ चुनाव ल़़डने की कोई संभावना नहीं है. ऐसे में राहुल का निर्विरोध कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाना भी तय दिखता है.