यूपी पुलिस ने फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वाले जालसाजो को धरा

लखनऊ के गोमतीनगर में पुलिस ने फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर लोगों को ठगने वाले जालसाजो को दबोचा. जालसाजो के  पास कई जाली प्रमाण पत्र व अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं. पूछताछ में सामने आया है कि वह कई कंपनियों के लिए फर्जी आईएसओ प्रमाण पत्र भी बनाकर बेचता था. पुलिस उसके अन्य साथियों को तलाश रही है.

एएसपी नार्थ की स्वॉट टीम ने गोमतीनगर स्थित सरस्वती अपार्टमेंट के पास से बुधवार को जालसाजी के आरोपित प्रवीन कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया. वह मूलरूप से आजमगढ़ के कोलीचोरा स्थित रेदोपुर का रहने वाला है. गोमतीनगर के सरस्वती अपार्टमेंट के डी-ब्लॉक में वह किराए का फ्लैट लेकर रह रहा था.

प्रवीन कुमार फ्लैट में ही जालसाजी का धंधा कर रहा था. पुलिस ने उसके फ्लैट की तलाशी ली तो वहां से पांच लैपटॉप, 33 जाली प्रमाण पत्र, नौ स्टाम्प पेपर, फर्जी मुहरें, दो चेक बुक और 2.87 लाख रुपये बरामद हुए हैं. एएसपी नार्थ अनुराग वत्स ने बताया कि प्रवीन हर तरह के जाली प्रमाण पत्र 20 से 25 हजार रुपये लेकर बनाता था. उसके फ्लैट से आईएसओ प्रमाण पत्र भी बरामद हुए हैं.

पुलिस के मुताबिक प्रवीन कुमार ग्रेजुएट है. वह इस फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड है और पिछले एक साल से जाली प्रमाण पत्र का गोरखधंधा कर रहा है. उसने अब तक जाली प्रमाण पत्र से करीब ढाई करोड़ रुपये कमाए हैं. इसकी ओर से 450 से अधिक प्रमाण पत्र बनाए जाने का मामला सामने आया है. प्रवीन से कई बिल्डरों ने भी आईएसओ प्रमाण पत्र ख़रीदा है. पुलिस को एक बड़े ग्रुप के बारे में जानकारी मिली है, जिसने इससे फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया है. केरला में चल रही उसकी फर्म उसी प्रमाण पत्र से कारोबार कर रही है. पुलिस प्रमाण पत्र हासिल करने वालों के बारे में छानबीन कर रही है.

विकास दीप जो रजिस्ट्रार कार्यालय का कर्मचारी है. प्रवीन ने ऐसे ही लोगो के साथ मिलकर कंपनियों तक पहुंचने के लिए एक चेन बनाई थी. वह उन्हें कमीशन देता था. इसके अलावा वह विकास दीप के रजिस्ट्रार कार्यालय से उन फर्मों व कंपनियों के मालिकों का नंबर हासिल कर सीधे उनसे संपर्क करता था. वह फर्म की कमियां बताकर उनको यह जानकारी देता था कि उन्हें सरकार से किसी भी कीमत पर आईएसओ प्रमाण पत्र नहीं मिल सकता है, इसीलिए वह लोग उससे मिलकर रकम देकर जाली दस्तावेज बनवा लेते थे.

किसी कंपनी को जारी किए गए आईएसओ प्रमाण पत्र की नकल कर हूबहू वैसा ही प्रमाण पत्र स्कैनर व लैपटॉप की मदद से तैयार किया जाता था. उस पर अंतराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन के अधिकारी के फर्जी दस्तखत कर वहां की मुहर भी लगा दी जाती थी. इसके अलावा एक फर्जी आईएसओ नंबर भी उस पर लिख दिया जाता था. एएसपी नार्थ अनुराग वत्स ने बताया कि जालसाजों के पास मिले प्रमाण पत्र की जांच की गई तो सबसे पहले उसका आईएसओ नंबर चेक किया गया. वह नंबर अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन के डाटा बेस से जुड़ा नहीं था। इसके अलावा दस्तखत व मुहर भी जांच में फर्जी निकली.

प्रॉडक्ट की गुणवत्ता के लिए दिया जाता है आईएसओ प्रमाण पत्र-
आईएसओ प्रमाण पत्र किसी कंपनी से बनाए जा रहे प्रॉडक्ट की गुणवत्ता प्रूफ करने के लिए दिया जाता है. आईएसओ प्रमाण पत्र यह साबित करता है कि प्रॉडक्ट ग्राहक की सभी जरूरतें पूरा करता है और सुरक्षित है.

ऐसे किया जाता है आईएसओ के लिए आवेदन-
कोई भी कंपनी अपने प्रॉडक्ट के लिए आईएसओ प्रमाण पत्र के लिए सीधे भारतीय मानक ब्यूरो में आवेदन कर सकता है. इसके अलावा भारतीय मानक ब्यूरो से अप्रूव्ड संस्थाएं भी हैं, जो आईएसओ प्रमाण पत्र दे सकती हैं. जिसको आईएसओ के लिए आवेदन करना होता है, वह एनएबीसीबी (National Accreditation Board for Certification Bodies) में भी आवेदन कर सकता है.