निलंबन के खिलाफ उत्तराखंड के 9 विधायकों की शिकायत का अब कोई औचित्य नहीं : SC

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि उत्तराखंड विधानसभा में कांग्रेस के नौ विद्रोही विधायकों को अयोग्य घोषित करने के अध्यक्ष के फैसले को सही ठहराने वाले नैनीताल हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती देने वाली अपील का अब सिर्फ ‘अकादमिक’ मकसद रह गया है.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इन विधायकों की अपील का निस्तारण करते हुए कहा कि अब राज्य में नई विधानसभा का गठन हो गया है.

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वह हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केन्द्र की अपील पर सुनवाई करेगा. हाईकोर्ट ने राज्य में तत्कालीन कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करके राष्ट्रपति शासन लागू करने को ‘असंवैधानिक’ करार दिया था.

पीठ ने कहा कि हमारी सुविचारित राय है कि इन विधायकों की अपील का अब अकादमिक मकसद रह गया है और नई विधानसभा का गठन हो चुका है. पीठ ने आगे कहा कि ऐसी स्थिति में अयोग्य घोषित किए गए तत्कालीन विधायकों की शिकायत का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है.

कोर्ट ने इस मामले को अब 12 सप्ताह बाद सूचीबद्ध कर दिया है. शीर्ष अदालत ने पिछले साल सितंबर में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा सहित कांग्रेस के नौ विद्रोही विधायकों को अयोग्य करार देने के फैसले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था.

कोर्ट ने विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल, जिन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव सदन में लंबित था, द्वारा नौ विधायकों को अयोग्य घोषित करने के फैसले की संवैधानिकता पर चर्चा से भी इंकार कर दिया था.