मौलाना आजाद की जयंती आज: जानें कुछ खास बातें

देश की आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले मौलाना अबुल कलाम आजाद का योगदान काफी अहम है. उन्हें ना सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनकी भूमिका के लिए याद किया जाता है बल्कि आजादी के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए भी याद किया जाता है.

अबुल कलाम आजाद को आजाद देश का पहला शिक्षा मंत्री बनाया गया था. उन्होंने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया. शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. अबुल कलाम आजाद का जन्म 11 नवंबर 1888 में मक्का के सऊदी अरब में हुआ था, उनका पूरा नाम मौलाना सैय्यद अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन अहमद आजाद था, लेकिन उन्हें मौलाना आजाद के नाम से जाना जाता है.

उन्होंने लिखने के लिए आजाद नाम का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था. मौलाना आजाद उर्दू में शायरी लिखा करते थे, वह धर्म से जुड़े दर्शन भी लिखा करते थे, उन्होंने बतौर पत्रकार भी अपनी भूमिका निभाई और ब्रिटिश सरकार की जमकर आलोचना की. मौलाना आजाद को खिलाफत आंदोलन के लिए भी जाना जाता है, इसी दौरान वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के संपर्क मे आए थे और वह उनके अहिंसा के सिद्धांत को मानने लगे. मौलाना आजाद ने गांधीजी द्वारा चलाए गए स्वदेशी आंदोलन, असहयोग आंदोलन में खुलकर हिस्सा लिया और 1919 के रॉलेट एक्ट का भी जमकर विरोध किया.

भारत रत्न लेने से किया था मना
आजाद साहब ने भारत रत्न लेने से मना कर दिया था. बाद में 1992 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया. उनकी जयंती राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रुप में मनाई जाती है. आजाद साहब ने कहा था. मैं उस अखंडता का हिस्सा हूं. जिसे भारतीय राष्ट्रवाद कहा जाता है.