पलायन को रोकना सरकार के समक्ष सबसे बड़ी चुनौतीः सीएम रावत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य स्थापना दिवस की पूर्व संध्या को जारी अपने संदेश में प्रदेशवासियों को उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के 17 वर्ष पूर्ण होने पर हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं. मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने सभी ज्ञात-अज्ञात महान राज्य आंदोलनकारियों को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है.अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ों में विकास की रोशनी पहुंचाने के साथ ही वहां से हो रहे पलायन को रोकना सरकार के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है. इसके लिये ‘ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग’ का गठन किया गया है. इस आयोग का मुख्यालय, पलायन से सर्वाधिक प्रभावित जनपदों में से एक, पौड़ी में स्थापित किया गया है. गांवों में लोगों को रोकने के लिये, उन्हें आर्थिक विकास एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना होगा तथा उनको जीवन जीने की मूलभूत सुविधाएं देनी होगी.

इसलिए प्रदेश के 670 न्याय पंचायतों को ग्रोथ सेंटर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. प्रदेश में किसानों की आय को वर्ष 2022 तक दो गुना करने का लक्ष्य रखा गया है. लघु एवं सीमांत कृषकों को एक लाख तक का कृषि ऋण मात्र 2 प्रतिशत ब्याज पर दिये जाने हेतु ‘दीनदयाल उपाध्याय किसान कल्याण योजना’ लागू की गई है.

नर्सरी एक्ट 2017 लागू करने का निर्णय लिया गया है. पर्वतीय क्षेत्रों में छोटी एवं बिखरी जोतों के दृष्टिगत चकबंदी का निर्णय लिया गया है, जिससे किसानों को लाभ होगा. डी.बी.टी. के माध्यम से उर्वंरक पर सब्सिडी सीधे कृषकों के खाते में ट्रांसफर की जायेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सुशासन, भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी शासन के लिये प्रतिबद्ध है. रैबार कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि रैबार में उत्तराखण्ड मूल के राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात लोग हमारे निमंत्रण पर आये. उत्तराखण्ड के विकास की राह दिखाने के लिए अपने विचार रखे, अनुभव साझा किए और बहुमूल्य सुझाव भी दिए. सरकार इन सभी सुझावों पर सकारात्मक रूप से विचार कर प्रदेश की बेहतरी के लिये नीति बनायेगी. विज़न 2020 डाॅक्यूमेंट भी तैयार किया जा रहा है.

राज्य में पर्यटन विकास हेतु सरकार ने ‘13 डिस्ट्रिक्ट 13 न्यू डेस्टिनेशन योजना’ के तहत सभी 13 जनपदों में 13 नये पर्यटन स्थल विकसित करने का निर्णय लिया है. इस वर्ष बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों ने चारधाम के दर्शन किये. भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केदारनाथ धाम में केदारपुरी के पुनर्निर्माण से संबंधित परियोजनाओं का शिलान्यास किया है. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अन्तर्गत प्रदेश में 99.6 प्रतिशत ग्राम विद्युतीकृत किये जा चुके. विगत सात माह में 28 गांवों का विद्युतीकरण किया गया है. सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2019 तक बिजली से वंचित हर परिवार को ग्रिड या आॅफ ग्रिड बिजली उपलब्ध करा दें. देहरादून की ऋषिपर्णा यानि रिस्पना और कुमाऊं क्षेत्र की कोसी नदी को पुनर्जीवित करने का अभियान प्रारम्भ कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा स्कूली और उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिये कदम उठाये जा रहे है. 10 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को एकीकृत करने का निर्णय लिया गया है.

सभी विद्यालयों में एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू करने का भी निर्णय लिया गया है. कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों का शैक्षिक कैलेण्डर लागू किया जा चुका है. राज्य के समस्त शहरी निकायों को भी मार्च 2018 तक ओ.डी.एफ. बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही वर्ष 2022 तक राज्य के प्रत्येक आवासहीन परिवार को आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है. डीबीटी के अंतर्गत राज्य खाद्य योजना की सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजने का निर्णय लिया है. ढ़ाई लाख से कम वार्षिक आय वाले ऐसे परिवार, जो उज्जवला योजना से लाभान्वित नही हो पाये है, को राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क गैस कनैक्शन वितरित करने का निर्णय लिया गया है.

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया है कि उन्होंने उत्तराखण्ड को चारधाम आलवेदर रोड का उपहार दिया. चारधाम आलवेदर रोड के लिए भूमि अधिग्रहण, वन भूमि हस्तानांतरण और मुआवजा वितरण कार्य शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है. ऋषिकेश.कर्णप्रयाग रेलवे लाईन एवं रुड़की.देवबंद रेलवे लाईन के लिए त्वरित गति से भूमि अधिग्रहण प्रगति पर है. संपर्क मार्ग को सुदृढ़ बनाने के लिए हरिद्वार, रूद्रपुर, देहरादून और हल्द्वानी में बाईपास/रिंग रोड का निर्माण प्रस्तावित है.

सरकार ने आगामी 05 वर्षों में 01 लाख से अधिक युवाओं को स्किल्ड बनाने का लक्ष्य रखा है. सरकार ने सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग के लिये स्टार्टअप नीति 2017 लागू कर दी है. इस वर्ष लगभग 1400 करोड़ रूपये के औद्योगिक निवेश प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई है जिससे लगभग 5000 युवाओं को रोजगार मिलेंगा. सरकार ने बड़ी संख्या में लंबे समय तक सुगम क्षेत्रों में तैनात डाक्टरों का स्थानान्तरण दुर्गम एवं पर्वतीय क्षेत्रों में किया है. दुर्गम क्षेत्रो तक उन्नत चिकित्सा सुविधाएू पहुचांने के लिये ई-अस्पतालो की शुरूआत की गई है. टेलीमेडिसिन तथा टेली रेडियोलाॅजी भी प्रारम्भ किया जा रहा है. प्रत्येक जिला चिकित्सालय मे आई0सी0यू0 की स्थापना करने का निर्णय लिया गया है.

जीएसटी कानून पारित करने में उत्तराखण्ड देश के अग्रणी राज्यों में एक है, व्यापारियों को इससे कोई परेशानी न हो. इसके लिए हेल्पलाइन नम्बर और नोडल कार्यालयों की स्थापना की गई है. महिलाओं को सशक्त बनाना राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है. ’प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सभी जनपदों में लागू की गई है’. महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों को टेक होम राशन की आपूर्ति की जा रही है. उत्तराखण्ड देवभूमि ही नही वरन् वीर भूमि भी है. सैनिक एवं अर्द्धसैनिक बलों मे ड्यूटी के दौरान वीरगति को प्राप्त होने वाले उत्तराखण्ड निवासी जवानों के आश्रितों को राज्य सरकार द्वारा उनकी शैक्षिक योग्यता के आधार पर सेवायोजित करने का निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही शहीद पुलिस कर्मियों के परिजनो को दी जाने वाली आर्थिक सहायता 10 लाख रूपये से बढ़ाकर 15 लाख रूपये कर दी गई है.

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने राज्यवासियों का आह्वाहन किया कि सभी लोग संकल्प लें, कि हर व्यक्ति उत्तराखण्ड प्रदेश और भारत वर्ष के समग्र विकास और समृद्धि हेतु अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देगा. यही शहीद राज्य आंदोलनकारियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. हमे मिलकर उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना है.