आर्मी चीफ ने केएम करियप्पा को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग की

शनिवार को भारत आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने देश के पहले सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल जनरल के एम करियप्पा को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न की मांग की. जनरल रावत ने कहा, ‘जब वक्त आ गया है कि इस अवॉर्ड के लिए फील्ड मार्शल करियप्पा का नाम लिया जाए.

अगर ये अवॉर्ड बाकी लोगों को दिया जा सकता है, तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि ये करियप्पा को न मिले, वो इसके हकदार हैं. हम जल्द ही इस मुद्दे पर अपनी बात रखेंगे.’

जनरल रावत का ये बयान फील्ड मार्शल करियप्पा जनरल थिमय्या (FMCGT) की ओर से कोलोनल केसी सुबय्या के आग्रह के बाद आया है. जनरल रावत कर्नाटक के कोडागु जिले के कावेरी कॉलेज के एक समारोह में हिस्सा लेने आए थे. उन्होंने यहां जनरल करियप्पा और के एस थिमैय्या की मूर्ति का अनावरण किया.

जनरल के एस थिमैय्या भी जनरल करियप्पा की तरह कर्नाटक के कोडागु जिले से हैं.रावत ने कहा कि ‘योद्धाओं की इस धरती पर आने और जनरल करियप्पा और जनरल थिमैय्या की मूर्तियों का अनावरण करके बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूं.’

करियप्पा भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ थे. वो 18 अप्रैल, 1986 को फील्ड मार्शल बने. वो भारतीय सेना के सबसे ऊंचे रैंक फील्ड मार्शल के हकदार बने. अब तक ये रैंक उनके बाद बस फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ को ही हासिल है. दूसरे विश्व युद्ध में बर्मा में जापानी सेना के सामने साहस दिखाने के लिए उन्हें ब्रिटिश साम्राज्य की ओर से सम्मानित किया गया था.

1947 में भारत-पाक के युद्ध के दौरान करियप्पा ने ही भारतीय सेना को पश्चिमी मोर्चे पर बढ़त दिलाई थी.
करियप्पा तीन साल भारतीय सेना में रहे. वो आर्मी से 1953 में रिटायर हुए और 1956 तक ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भारतीय उच्चायुक्त के तौर पर कार्यरत रहे. 1993 में 94 साल की उम्र में बेंगलुरु में उनका निधन हो गया.