तीन साल में मोदी सरकार ने बनाया बिजनेस का माहौल, कारोबार सुगमता में 42 स्थान की छलांग

भारत ने विश्वबैंक की कारोबार सुगमता रिपोर्ट रैंकिंग में लंबी छलांग लगाई है. देश की रैंकिंग 30 पायदान सुधरकर 100वें स्थान पर पहुंच गई. इससे उत्साहित सरकार ने सुधारों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया, जिससे देश आने वाले वर्ष में कारोबार सुगमता के मामले में शीर्ष 50 देशों में शामिल हो सकता है.

नरेंद्र मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के समय भारत की रैंकिंग 142 थी. पिछले साल यह 130 थी. इस साल भारत एकमात्र बड़ा देश है जिसने कराधान, निर्माण परमिट, निवेशक संरक्षण और ऋण शोधन के लिए उठाए गए कदम के दम पर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की.

विश्व बैंक ने कहा इस साल के आकलन में यह शीर्ष 10 सुधारकर्ता देशों में एक है. कारोबार सुगमता के 10 संकेतकों में से आठ में सुधारों को क्रियान्वित किया गया. यह पहला मौका है जब भारत इस मामले में पहले 100 देशों में शामिल हुआ है.

इस बारे में अपनी प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार सुधार, निष्पादन और रूपांतरण के मंत्र के साथ रैंकिंग में और सुधार तथा आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने को प्रतिबद्ध है. उन्होंने कारोबार सुगमता में भारत की रैंकिंग में उछाल की सराहना की और कहा कि यह चौतरफा तथा विविध क्षेत्रों में किए गए सुधारों का नतीजा है.

नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा, ‘व्यापार सुगमता के मामले में हमने जो रैंकिंग हासिल की है, यह अबतक की सबसे बड़ी उछाल है. यह भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले तीन-चार साल से हम रैंकिंग से संबद्ध सभी 10 मानदंडों में सुधार की कोशिश कर रहे थे, ताकि देश में कारोबार करना आसान हो.’

अपनी सालाना रिपोर्ट ‘डूइंग बिजनेस 2018: रिफार्मिंग टू क्रिएट जॉब्स’ में विश्वबैंक ने कहा कि भारत की रैंकिंग 2003 से अपनाए गए 37 सुधारों में से करीब आधे का पिछले चार साल में किए गए क्रियान्वयन को प्रतिबिंबित करता है.

हालांकि, व्यापार माहौल के आकलन के लिए जून को आखिरी महीने के रूप में लिया गया है. इससे रैंकिंग में जीएसटी क्रियान्वयन के बाद के कारोबारी माहौल पर गौर नहीं किया गया है. इस नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था से 1.3 अरब की आबादी वाला देश एक कर के साथ एक बाजार में तब्दील हुआ और व्यापार के लिए राज्यों के बीच की बाधाएं दूर हुई हैं.

विश्वबैंक की इस रिपोर्ट से नरेंद्र मोदी सरकार के तरकश में नए तीर आ गए हैं. यह रिपोर्ट ऐसे समय आयी है जब मोदी सरकार जीएसटी और नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था में आयी नरमी को लेकर विपक्ष के निशाने पर है.

जेटली ने कहा, ‘पिछले तीन साल में हम 142वें स्थान से 100 स्थान पर आ गए. और मुझे लगता है कि जिन क्षेत्रों में हम अब भी पीछे हैं, उनमें भी काफी प्रगति हो रही है। इसके आधार पर यह भरोसे किया जा सकता है कि हमारे पास अपनी स्थिति में और उल्लेखनीय सुधार लाने की क्षमता है.’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का लक्ष्य शीर्ष 50 देशों में आने का है और यह प्राप्त किया जा सकता है.

जेटली ने कहा, ‘मुझे भरोसा है कि यह किया जा सकता है और इसीलिए तीन से चार क्षेत्र हैं जहां काम किया जाना है। हम पूरे दम-खम के साथ इसे आगे बढ़ाएंगे.’ देश में जिन मानदंडों में 2016-17 में सुधार हुआ है, उसमें कारोबार शुरू करने में तेजी, प्रक्रियाओं में कमी, कर्ज की आसान पहुंच, अल्पांश निवेशकों का संरक्षण, कर भुगतान, सीमा पार व्यापार को आसान बनाने तथा ऋण शोधन को सुगमत बनाना शामिल है.

हालांकि इसके बावजूद भारत कारोबार शुरू करने, अनुबंध के लागू करने तथा निर्माण परमिट के मामले में अब भी पीछे है. नई कंपनी को पंजीकरण कराने में अब भी 30 दिन का समय लगता है जो 15 साल पहले 127 दिन था, लेकिन स्थानीय उद्यमियों के लिए प्रक्रियाओं की संख्या जटिल बनी हुई है. उन्हें अब भी 12 प्रक्रियाओं से गुजरने की आवश्यकता होती है.

हालांकि भारत निवेशकों के संरक्षण के मामले में दुनिया में चौथे स्थान (पिछले साल 13वें स्थान) पर आ गया, लेकिन बिजली प्राप्त करने के मामले में स्थिति बिगड़ी है और पिछले साल के 26 से 29वें स्थान पर आ गया. कर्ज उपलब्धता रैंकिंग 44 से सुधरकर 29 पर आ गई. वहीं कर भुगतान सुगमता के मामले में रैंकिंग 172वें से सुधकर 119वें स्थान पर आ गई.

शाह ने रैंकिंग में सुधार का श्रेय मोदी को दिया
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने विश्व बैंक की कारोबार सुगमता सूची में भारत की रैंकिंग सुधरने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया. शाह ने कहा कि इस रैंकिंग के परिणाम नागरिकों के जीवन में सुधार व विभिन्न सुधारों के कार्यान्वयन पर प्रधानमंत्री मोदी के ‘ध्यान’ को परिलक्षित करता है.

शाह ने कहा है कि बेहतर कारोबारी माहौल के चलते उद्यमियों विशेषकर छोटे व मझौले उपक्रमों के लिए बेहतर कारोबारी अवसर बनेंगे.