सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 35A की वैधता पर सुनवाई तीन महीने के लिए टली

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जम्मू कश्मीर के विशेष अधिकारों से जुड़े अनुच्‍छेद 35ए की संवैधानिक वैधता के मामले की सुनवाई तीन महीने के लिए टल गई है. अनुच्छेद 35A की वैधता को चार याचिकाओं के जरिए चुनौती दी गई है. एनजीओ ‘वी द सिटीजन’ ने मुख्‍य याचिका 2014 में दायर की थी.

अनुच्छेद 35A की वैधता के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की एक स्पेशल बेंच सुनवाई कर रही है. कोर्ट में दायर याचिकाओं में उन प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जो बाहरी शख्स से शादी करने वाली महिलाओं को संपत्ति के अधिकार से वंचित करता है.

इस बीच, जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी संगठनों ने अनुच्छेद 35ए को खत्म करने की सूरत में बड़े आंदोलन की चेतावनी दे डाली है. एक संयुक्त बयान में अलगाववादी नेताओं ने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट राज्य के लोगों के हितों के खिलाफ कोई फैसला देता है, तो जनता आंदोलन के लिए तैयार हो जाए.

बता दें कि अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और मोहम्मद यासिन मलिक अनुच्छेद 35ए में किसी तरह के बदलाव का विरोध कर रहे हैं. इनका मानना है कि इससे जम्मू कश्मीर के लोगों का भारी नुकसान होगा.

इस मसले पर जम्मू कश्मीर की प्रमुख पार्टी नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 35-ए जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए आस्था का विषय है. इसलिए इसको लेकर कोई बहस नहीं हो सकती. पार्टी राज्य के खास दर्जे की रक्षा के लिए हर तैयार है.