पाक करे आतंकवाद पर कार्रवाई, वरना हम अपने हिसाब से निपटेंगे : अमेरिका

अमेरिका ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा हैं कि वह आतंकवादी संगठनों के खिलाफ ‘निर्णायक’ कार्रवाई करें. अगर वह आतंकवादी संगठनों के खिलाफ ‘निर्णायक’ कार्रवाई करने में विफल रहता है तो अमेरिका अपने तरीके से निपटेगा. वह इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए अपनी ‘अलग तरीके’ की रणनीति अपनाएगा.

विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने गुरूवार को यह जानकारी दी.विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन हाल ही में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत की अपनी पहली यात्रा के बाद लौटे हैं. इसके एक दिन बाद विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नोर्ट ने बताया कि विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने पाकिस्तान से कहा है कि वह आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करे और अपनी सरजमीं पर बनी पनाहगाहों का खात्मा करें.

प्रवक्ता ने कहा, ‘हमने कई बार पाकिस्तान से यह कहा है कि उसे अपनी सीमाओं के भीतर आतंकवादी संगठनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए.’ विदेश यात्रा के अंतिम चरण जिनेवा में एक संवाददाता सम्मेलन में टिलरसन ने कहा कि अमेरिका ने आतंकवादियों पर जानकारी साझा की है.

टिलरसन ने पाकिस्तान को दिए संदेश में कहा, ‘हम चाहते हैं कि पाकिस्तान यह करें. हम आपसे यह करने के लिए कह रहे हैं, हम कुछ भी नहीं मांग रहे हैं. आप एक संप्रभु देश हैं. आप फैसला करेंगे कि आप क्या करना चाहते हैं लेकिन इसे समझ लीजिए कि यह आवश्यक है. अगर आप यह नहीं करना चाहते तो हम इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए अपनी अलग रणनीति अपनाएंगें.’

वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने गुरूवार को कहा कि पाकिस्तान ना तो अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण करेगा और ना ही अपनी संप्रभुत्ता से समझौता करेगा. वे विदेश मामलों पर नेशनल असेंबली स्टैंडिंग कमेटी के साथ एक बैठक बोल रहे थे.

आसिफ ने दावा किया कि अमेरिका ने पाकिस्तान को कोई विशेष ‘इच्छा सूची’ नहीं दी है. अमेरिका ने 75 वांछित आतंकवादियों की सूची सौंपी हैं और पाकिस्तान पर इस बात के लिए जोर दिया है कि वह हक्कानी नेटवर्क पर कड़ा रुख अपनाए.आसिफ की टिप्पणियों पर एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि टिलरसन ने अपनी यात्रा के दौरान पाकिस्तानी नेतृत्व के सामने अमेरिका की ‘उम्मीदों’ को रखा.प्रवक्ता ने कहा कि टिलरसन ने पाकिस्तान की यात्रा के दौरान वहां के नेतृत्व को बताया कि अमेरिका ‘सकारात्मक तरीके’ से पाकिस्तान के साथ काम करना चाहता है क्योंकि यह पाकिस्तान के दीर्घकालिक हित में भी है.