जीएसटी का सबसे बड़ा लाभार्थी उपभोक्ता, मध्यम वर्ग होगा: पीएम मोदी

नई दिल्‍ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ईस्ट, साउथ और साउथ एशियन देशों के लिए कॉन्फ्रेंस ऑन कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन का उद्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि ये सम्मेलन अहम है, क्योंकि इसके जरिए उपभोक्ताओं की जरूरतों और उम्मीदों को पूरा करने की कोशिश की जा सकती है. पीएम मोदी ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण सरकार की अहम जिम्मेदारी है. वहीं पीएम मोदी ने वेदों का हवाला देते हुए कहा कि इसमें भी उपभोक्ता संरक्षण का जिक्र किया गया है.

इसके अलावा पीएम मोदी ने जीएसटी को लेकर मची खींचतान को लेकर कहा कि इससे सबसे ज्यादा फायदा उपभोक्ताओं को होगा. उन्होंने कहा कि हमने हाल ही में जीएसटी लागू किया है. जीएसटी के कारण, विभिन्न अप्रत्यक्ष और छिपे हुए करों का अस्तित्व समाप्त हो गया है. जीएसटी का सबसे बड़ा लाभार्थी उपभोक्ता, मध्यम वर्ग होगा. जीएसटी से कंपनियों के बीच कॉम्पिटिशन बढ़ेगा, जिससे चीजों के दाम घटेंगे और इससे गरीब और मिडिल क्लास उपभोक्‍ता को फायदा होगा. उन्‍होंने कहा, ‘नया कन्ज़्यूमर प्रोटेक्शन कानून बनाया जा रहा है.

इसमें उपभोक्ता सशक्तिकरण मुख्य होगा और भ्रामक विज्ञापनों पर गाइडलाइन और कड़ी होगी.नए भारत के निर्माण के लिए हम केवल उपभोक्ता संरक्षण से बेहतर उपभोक्ता प्रथाओं और उपभोक्ता समृद्धि के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं. हमारा ध्‍यान उपभोक्ता सशक्तिकरण पर केंद्रित है और यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ता को कोई कठिनाई न हो.’

सम्मेलन में उपभोक्ता संरक्षण संबंधी दिशानिर्देशों को लागू करने को लेकर एशियाई देशों द्वारा उठाये गये कदमों के साथ-साथ वित्तीय सेवाओं एवं ई-कॉमर्स के उपभोक्ताओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा होगी. कार्यक्रम में केन्द्रीय उपभोक्ताओं कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान, केन्द्रीय राज्य मंत्री सी.आर चौधरी मौजूद रहे.चीन, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, बांग्लादेश और श्रीलंका समेत करीब 20 देशों ने इस कार्यक्रम में भागीदारी सुनिश्चित की है. पाकिस्तान और उत्तर कोरिया को इसमें निमंत्रण नहीं दिया गया था. इस सम्मेलन में अलग-अलग देश उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए अपने-अपने तौर तरीके और अनुभवों को साझा करेंगे.

वित्तीय सेवाओं तथा ऑनलाइन सेवाओं के उपभोक्ताओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों के मद्देनजर कानूनी रूप-रेखा के बारे में भी चर्चा करेंगे. इसमें एशियाई देशों के एक-दूसरे के अनुभव से सीखने के बारे में भी चर्चा की जाएगी. इसके साथ ही एशियाई स्तर पर उपभोक्ता की शिकायतों का समाधान तथा इस संबंध में द्विपक्षीय संबंधों पर भी बात की जाएगी.
उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र ने 1985 में उपभोक्ता संरक्षण संबंधी दिशानिर्देश तय किए थे. भारत उसके अगले ही साल 1986 में इसं संबंध में अलग कानून बनाने वाला पहला देश बन गया था.