देशभक्ति दर्शाने के लिए सिनेमा हॉल में खड़े होने की जरूरत नहीं : ओवैसी

एमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से सहमत हैं कि लोगों को ‘अपनी आस्तीनों पर देशभक्ति लेकर चलने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता’.

हैदराबाद से लोकसभा सदस्य ने कहा कि सिनेमा हॉल देशभक्ति दिखाने का स्थान नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘आप जो कह रहे हैं, अगर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है तो मुझे लगता है कि इसमें दम है. क्यों किसी को सिनेमा हॉल के भीतर देशभक्ति दिखानी चाहिए.’

लोकसभा सांसद ओवैसी ने कहा, ‘किसी को अपनी देशभक्ति के लिए सिनेमा हॉल में खड़े होने की जरूरत नहीं है. कौन कितना देशभक्त है इसका पता इससे बिल्कुल भी नहीं लग सकता.’

उन्होंने कहा, ‘अमूमन लोग जब सिनेमा हॉल जाते हैं तो वे अलग उद्देश्य से जाते हैं …मुझे नहीं लगता कि आपको सिनेमा हॉल में अपनी देशभक्ति दिखाने की जरूरत है.’

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देशभक्ति साबित करने के लिए सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के समय खड़ा होना जरूरी नहीं हैं. यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगान के लिए खड़ा नहीं होता है तो ऐसा नहीं माना जा सकता कि वह कम देशभक्त है. समाज को नैतिक पहरेदारी की आवश्यकता नहीं है, जैसी टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगली बार सरकार चाहेगी कि लोग सिनेमाघरों में टी शर्ट्स और शार्ट्स में नहीं जाएं, क्योंकि इससे राष्ट्रगान का अपमान होगा. पीठ ने कहा कि वह सरकार को अपने कंधे पर रखकर बंदूक चलाने की अनुमति नहीं देगी. पीठ ने इसके साथ ही सरकार से कहा कि वह राष्ट्रगान को नियंत्रित करने के मुद्दे पर विचार करे.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देशभर के सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय ध्वज संहिता में संशोधन करने पर विचार करे.