उत्तराखंड का एक ऐसा एक्स्प्लोरर जिसको गूगल ने भी आज याद किया

गूगल ने शनिवार को अपना डूडल नैन सिंह रावत को समर्पित किया है. नैन से ब्रिटिश पीरियड में तिब्बत का मैप बनाने के चलते पहचाने गए. ये वो दौर था जब तिब्बत में बाहरी लोगों के प्रवेश पर बैन था, लिहाजा मैप तैयार करने का काम न केवल जोखिम भरा था बल्कि सुविधाओं के बगैर ये जानलेवा काम भी था.

पंडित नैन सिंह रावत

नैन सिंह एक एक्सप्लोरर ही नहीं थे बल्कि आधुनिक विज्ञान पर हिन्दी में किताब लिखने वाले वो पहले भारतीय भी थे. उन्होंने अक्षांश दर्पण नाम की एक किताब लिखी जो सर्वेएर की आने वाली पीढियों के लिए भी एक ग्रंथ सरीखा है. ब्रिटिश राज में भी उनके कार्यों को काफी सराहा गया. उनके कामों को देखते हुए उन्हें ‘कम्पेनियन ऑफ द इंडियन एम्पायर’ का खिताब भी दिया गया था.

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी 19वीं शताब्दी के प्रख्यात एक्सप्लोरर स्वर्गीय नैन सिंह रावत की जयंती पर उनका भावपूर्ण स्मरण किया. अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय नैन सिंह रावत हिमालय के सबसे प्रारंभिक अन्वेषकों में से एक थे. उन्होंने नेपाल होते हुए तिब्बत तक के व्यापारिक मार्ग का नक्शा तैयार किया और पहली बार ल्हासा की सही भौगोलिक स्थिति का आकलन किया.

नैन सिंह रावत जी का मान आज आधुनिक दुनिया भी कर रही है. प्रख्यात इंटरनेट सर्च इंजन गूगल ने भी अपने प्रसिद्ध गूगल डूडल पर स्वर्गीय नैन सिंह रावत जी की उपलब्धियों को स्थान दिया है. नैन सिंह जी का सम्मान सिर्फ उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष का सम्मान है.