पाकिस्तान : शरीफ, उनकी बेटी और दामाद पर भ्रष्टाचार के आरोप तय, जेल भेजा जा सकता है

इस्लामाबाद|…. गुरुवार को पाकिस्तान की भ्रष्टाचार विरोधी अदालत ने पूर्व पीएम नवाज शरीफ, उनकी बेटी और उनके दामाद पर आरोप तय कर दिए.इसके बाद अब इन्हें जेल भेजा जा सकता है.सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को शरीफ को पीएम पद के अयोग्य घोषित करार दिया था.इसके बाद नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने 8 सितंबर को इस्लामाबाद की अकाउंटबिलिटी कोर्ट में शरीफ, उनके परिवार के सदस्यों और फाइनेंस मिनिस्टर इशाक डार के खिलाफ भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के 3 केस दर्ज किए थे.लंदन में प्रॉपर्टीज जुटाने का मामला.

पाकिस्तान के अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो ने शरीफ, उनकी बेटी मरियम नवाज और उसके पति रिटायर्ड कैप्टेन मोहम्मद सफदर के खिलाफ लंदन में प्रॉपर्टीज को लेकर केस दर्ज किए थे.हालांकि शरीफ और लीडिंग डिफेंस काउंसिल ख्वाजा हैरिस दोनों देश से बाहर हैं. तीनों आरोपियों ने अदालत से दोषी नहीं ठहराए जाने की अपील की थी. भ्रष्टाचार विरोधी अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कैप्टन सफदर के वकील अमजद परवेज की वह एप्लिकेशन खारिज कर किया जिसमें आरोप तय करने की कार्यवाही को टालने की अपील की गई थी.

शरीफ की लीगल टीम के दूसरे वकील आयशा हामिद ने एक एप्लिकेशन दायर कर आरोपों को तब तक टालने की अपील की, जब तक सुप्रीम कोर्ट NAB द्वारा शरीफ के खिलाफ दायर भ्रष्टाचार के मामले पर शरीफ की पिटीशन पर कोई फैसला नहीं सुना देता.हालांकि भ्रष्टाचार विरोधी अदालत ने यह अपील भी ठुकरा दी है. शरीफ की लीगल टीम की उस तीसरी एप्लिकेशन पर अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें पूर्व पीएम के खिलाफ दायर 3 मामलों को एक में मर्ज करने की अपील की गई थी.

नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने शरीफ, उनके फैमिली मेंबर्स और फाइनेंस मिनिस्टर इशाक डार के खिलाफ भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के 3 केस दर्ज किए थे.ये केस सुप्रीम कोर्ट द्वारा 28 जुलाई को पनामा पेपर्स स्कैंडल में शरीफ को दोषी और पीएम पद के अयोग्य ठहराए जाने के कई हफ्ते बाद दर्ज किए गए थे. इससे पहले, भ्रष्टाचार विरोधी अदालत शरीफ और उनके फैमिली मेंबर्स पर 13 अक्टूबर को आरोप तय करने वाली थी, लेकिन PML-N के वकीलों और पुलिस के बीच हिंसक संघर्ष के चलते सुनवाई 19 अक्टूबर तक के लिए टल गई थी.शरीफ और उनकी फैमिली ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है.पनामा मामले की जांच कर रही ज्वाइंट इन्वेस्टिगेशन टीम (जेआईटी) ने अपनी फाइनल रिपोर्ट 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी थी.इसमें कहा गया है कि 1990 में पीएम के तौर पर अपने दूसरे टेन्योर में शरीफ की फैमिली ने लंदन में प्रॉपर्टीज खरीदी थी.

शरीफ फैमिली के लंदन के 4 अपार्टमेंट से जुड़ा मामला उन 8 मामलों में शामिल है जिनकी नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने दिसंबर 1999 में जांच शुरू की थी. सुप्रीम कोर्ट ने 20 अप्रैल को दिए अपने फैसले में जेआईटी से कहा था कि वह लंदन फ्लैट्स की खरीद में की गई पैसों की हेराफेरी की जांच करे. पिछले साल ब्रिटेन से लीक हुए टैक्स डॉक्युमेंट्स बताते हैं कि कैसे दुनियाभर के 140 नेताओं और सैकड़ों सेलिब्रिटीज ने टैक्स हैवन कंट्रीज में पैसा इन्वेस्ट किया.इनमें नवाज शरीफ का भी नाम शामिल है.इन सेलिब्रिटीज ने शैडो कंपनियां, ट्रस्ट और कॉरपोरेशन बनाए और इनके जरिए टैक्स बचाया. लीक हुए डॉक्युमेंट्स खासतौर पर पनामा, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड और बहामास में हुए इन्वेस्टमेंट के बारे में बताते हैं. सवालों के घेरे में आए लोगों ने इन देशों में इन्वेस्टमेंट इसलिए किया, क्योंकि यहां टैक्स रूल्स काफी आसान हैं और क्लाइंट की आइडेंडिटी का खुलासा नहीं किया जाता.पनामा में ऐसी 3.50 लाख से ज्यादा सीक्रेट इंटरनेशनल बिजनेस कंपनियां हैं.

नवाज शरीफ के बेटों हुसैन और हसन के अलावा बेटी मरियम नवाज ने टैक्स हैवन माने जाने वाले ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में कम से कम चार कंपनियां शुरू कीं.इन कंपनियों से इन्होंने लंदन में छह बड़ी प्रॉपर्टीज खरीदी. शरीफ फैमिली ने इन प्रॉपर्टीज को गिरवी रखकर डॉएचे बैंक से करीब 70 करोड़ रुपए का लोन लिया.इसके अलावा, दूसरे दो अपार्टमेंट खरीदने में बैंक ऑफ स्कॉटलैंड ने उनकी मदद की. नवाज और उनके परिवार पर आरोप है कि इस पूरे कारोबार और खरीदफरोख्त में अनडिक्लेयर्ड इनकम लगाई गई. शरीफ की विदेश में इन प्रॉपर्टीज की बात उस वक्त सामने आई, जब लीक हुए पनामा पेपर्स में दिखाया गया कि उनका मैनेजमेंट शरीफ के परिवार के मालिकाना हक वाली विदेशी कंपनियां करती थी.